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मजदूरों की ट्रेनों से घर वापसी / सोनिया ने कहा- किराया कांग्रेस देगी; मध्यप्रदेश समेत 4 राज्यों ने भी खर्च उठाने की बात कही; केंद्र ने कहा- 85% किराया तो हम दे रहे हैं

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नई दिल्ली. लॉकडाउन की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों की स्पेशल ट्रेनों के जरिए घर वापसी हो रही है, लेकिन अब किराये को लेकर विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को केंद्र पर तंज कसा कि गुजरात के कार्यक्रम में ट्रांसपोर्ट और खाने पर 100 करोड़ खर्च किए जा सकते हैं तो मजदूरों को फ्री रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती?
सोनिया के इस बयान के बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश सरकार ने भी कहा कि मजदूरों का ट्रेन टिकट का खर्च हम उठाएंगे। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि किराए का 85% खर्च हम उठा रहे हैं। राज्यों को सिर्फ 15% खर्च उठाना है।
विवाद क्यों?
केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद प्रवासी मजदूरों को स्पेशल ट्रेनों के जरिए उनके घरों तक भेजा जा रहा है। अकेले महाराष्ट्र से अब तक 35 हजार प्रवासी मजदूरों को भेजा जा चुका है। 34 श्रमिक ट्रेनों के जरिए घरों को भेजे जा रहे इन मजदूरों से किराया लिए जाने को लेकर केंद्र की आलोचना की जा रही है। यात्रा के लिए मजदूरों से स्लीपर क्लास के अलावा 30 रुपए का सुपर फास्ट किराया और 20 रुपए का अतिरिक्त चार्ज श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए वसूल किया जा रहा है।
रेलवे 50 रुपए ज्यादा ले रहा: रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से घर जा रहे मजदूरों से 50 रुपए ज्यादा किराया लिया जा रहा है।
शनिवार को भिवंडी से गोरखपुर तक चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में हर यात्री के 800 रुपए लिए गए जबकि वास्तविक किराया 745 रुपए ही था।
पुरी से सूरत तक का किराया 710 रुपए लिया गया। आगरा कैंट से अहमदाबाद के 250 रुपए वसूले गए। नासिक से भोपाल तक का किराया 250 रुपए लिया गया।
बताया जा रहा है कि किराये के अलावा 30 रुपए सुपर फास्ट चार्ज और 20 रुपए अतिरिक्त चार्ज लिया जा रहा है।
सोनिया ने क्या कहा?
सोनिया ने सवाल उठाया कि जब विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने का किराया नहीं लिया गया तो फिर प्रवासी मजदूरों के लिए ऐसी विनम्रता क्यों नहीं दिखाई जा सकती? जब हम गुजरात के एक कार्यक्रम में सरकारी खजाने से 100 करोड़ रुपए ट्रांसपोर्ट और खाने पर खर्च कर सकते हैं, रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री के कोरोना फंड में 151 करोड़ रुपए दे सकता है तो फिर प्रवासियों को फ्री रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दे सकते?
सोनिया ने कहा- यह परेशान करने वाली बात है कि संकट की घड़ी में रेलवे प्रवासियों से किराया वसूल रहा है। मजदूरों के पास खाने-पीने और दवा का इंतजाम भी नहीं है और ऐसे में किराया वसूलना गलत है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के किराये का इंतजाम संबंधित राज्य की कांग्रेस कमेटी उठाएगी।
राज्य सरकारों ने क्या कहा?
बिहार: वीडियो मैसेज में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि छात्रों का ट्रेन किराया बिहार सरकार सीधे रेलवे को देगी। प्रवासी मजदूरों का यात्रा के दौरान जितना भी खर्च हुआ है, वह उन्हें 21 दिन का क्वारैंटाइन पीरियड पूरा करने के बाद वापस कर दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि ट्रेनों के जरिए राज्य में अपने घरों तक आ रहे प्रवासी मजदूरों को कोई किराया नहीं देना होगा।
राजस्थान: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार घर वापस लौट रहे मजदूरों का किराया देगी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश के बाद हमने यह फैसला लिया है।
छत्तीसगढ़: राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से वापस लौट रहे प्रवासी मजदूरों का किराया हमारी सरकार उठाएगी।
केंद्र सरकार को क्या सफाई देनी पड़ी?
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने किराये को लेकर उठे विवाद पर कहा- हमने कभी भी किसी मजदूर से किराया लेने की बात नहीं कही। किराये का 85% केंद्र सरकार और 15% राज्य सरकार को वहन करना है। रेलवे और राज्य सरकारों ने आपस में विचार विमर्श करने के बाद ट्रेनें चलाने का फैसला किया था।
हकीकत क्या है?
रेलवे के एक अधिकारी ने कहा- प्रवासी मजदूरों को खाना और पानी मुफ्त में दिया जा रहा है। हमने अब तक 34 ट्रेनें चलाई हैं। हमने जो अपनी एसओपी जारी की है, उसमें कहीं भी नहीं लिखा है कि किराया यात्रा करने वाले प्रवासी मजदूरों से वसूला जाए। सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि राजस्थान, तेलंगाना जैसे राज्य, जहां से ट्रेनें चल रही हैं, वे श्रमिकों के लिए किराया दे रहे हैं। झारखंड भी मजदूरों के लिए किराये का भुगतान कर रहा है।
गुजरात सरकार ने एक एनजीओ के माध्यम से यात्रा में आने वाले खर्च के एक हिस्से का भुगतान करने के लिए एनजीओ को जिम्मा सौंपा है। केवल महाराष्ट्र ही यात्रियों से किराया ले रही है। महाराष्ट्र के मंत्री नितिन राउत ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर अपील की है कि राज्य से बाहर जाने वाले प्रवासी मजदूरों का खर्चा राज्य सरकार उठाए।

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