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दिग्विजय का ‘आदिवासी कार्ड’ : विक्रांत भूरिया को युवक कांग्रेस की कमान, एक तीर से दो निशाने

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मध्य प्रदेश में युवक कांग्रेस के चुनाव सात साल बाद हुए। प्रदेश अध्यक्ष बने आदिवासी युवा नेता विक्रांत भूरिया। विक्रांत कैसे जीते? पार्टी के लगभग सभी नेता मानते हैं कि पर्दे के पीछे इसकी पटकथा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने लिखी है। अब सवाल- क्यों लिखी? जानकार मानते हैं कि उन्होंने आदिवासी कार्ड खेला है। इसके जरिए उन्होंने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला- दिग्विजय अपने कट्टर समर्थक कांतिलाल भूरिया के बेटे को सक्रिय राजनीति में लाने में सफल हो गए। जबकि प्रदेश अध्यक्ष के सभी 9 में केवल विक्रांत ही ऐसे उम्मीदवार थे, जिन्होंने सदस्यता अभियान में हिस्सा ही नहीं लिया। बावजूद इसके उन्हें 20 हजार से अधिक मतों से शानदार जीत मिली। जो विक्रांत के बूते संभव नहीं दिखाई देती। इससे पहले वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में झाबुआ से टिकट दिलाकर दिग्विजय ने विक्रांत को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी, हालांकि वे कामयाब नहीं हो पाए थे। वर्ष 2023 के चुनाव के लिए प्रदेश में युवाओं के बीच नेटवर्क अपग्रेड करने में विक्रांत को युवक कांग्रेस की कमान मिलने से दिग्विजय सिंह को आसानी होगी।
दूसरा – युवक कांग्रेस का अध्यक्ष आदिवासी के बनने से अब आदिवासी नेता के प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनने की संभावना कम हो जाएगी। दरअसल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ आदिवासी कार्ड खेल रहे थे। वे अपने कैंप के बाला बच्चन को यह पद देने की तैयारी कर रहे थे। इस बीच उमंग सिंघार ने मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर दी। सिंघार, दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं लेकिन विक्रांत की जीत ने दिग्विजय की राजनीति को आसान कर दिया है। क्योंकि नेता प्रतिपक्ष पद की दावेदारी दिग्विजय कैंप के डाॅ. गोविंद सिंह कर रहे हैं। विक्रांत के अध्यक्ष बनने से नेता प्रतिपक्ष के लिए डाॅ. सिंह का दावा पार्टी में अंदर मजबूत हो जाएगा। दिग्विजय सिंह ऐसा ही चाहते हैं। यही वजह है कि कमलनाथ यह कार्ड खेल पाते, उससे पहले दिग्विजय सिंह ने चाल चल दी।
अध्यक्ष बनने से पहले विक्रांत किसी पद पर नहीं रहे
विक्रांत भूरिया युवक कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी करने से पहले संगठन के किसी भी पद पर नहीं रहे। पेशे से डाक्टर विक्रांत जूनियर डाॅक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं। पार्टी में मौजूदगी केवल इतनी रही है कि वे झाबुआ से विधानसभा चुनाव से कांग्रेस से उम्मीदवार रहे हैं।
कमलनाथ को सज्जन वर्मा ने राजी किया था
पार्टी सूत्रों ने बताया कि बिना कमलनाथ की सहमति के विक्रांत को युवक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी मिलना आसान नहीं था। ऐसे में दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ को सहमत करने के लिए उनके ही कैंप के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को तैयार किया था। वे बीच की कड़ी बने और कमलनाथ को राजी करने में सफल हुए।
आगे क्या.. प्रदेश अध्यक्ष के लिए ओबीसी कार्ड खेल सकते हैं दिग्विजय
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि यदि कमलनाथ पद छोड़ते हैं तो किसी युवा नेता को ही कमान सौंपी जाएगी। युवक कांग्रेस के चुनाव परिणाम आने के बाद दिग्विजय सिंह ओबीसी कार्ड खेल सकते है। ऐसे में जीतू पटवारी या अरुण यादव में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बता दें कि जीतू और अरुण के अलावा उमंग भी राहुल गांधी की कोर टीम के मेंबर हैं।

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