Breaking Newsअन्य खबरेंस्वास्थ्य

हमीदिया में लगेंगी 5 डायलिसिस मशीनें, RO का पानी नहीं मिलने से हुई थी बंद

भोपाल \ हमीदिया अस्पताल में अगले महीने से पांच और डायलिसिस मशीनें शुरू हो जाएंगी। इसके बाद डायलिसिस के लिए मरीजों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अभी मशीनें कम होने की वजह से नए मरीजों की डायलिसिस नहीं हो पा रही थी। पहले से डायलिसिस करा रहे कुछ मरीजों की हफ्ते में तीन दिन की जगह सिर्फ दो दिन डायलिसिस हो पा रही थी। इन डायलिसिस मशीनों को चलाने के लिए पानी नहीं होने की वजह से डेढ़ साल से मशीनें बंद थीं। अब पानी के लिए आरओ प्लांट लगाने का काम शुरू हो गया है। एक-एक हजार लीटर क्षमता के दो प्लांट लगाए जाएंगे। इसके बाद करीब 15 दिन में मशीनें शुरू हो जाएंगी।

इस वजह से बंद हो गई थी मशीनें

हमीदिया अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा पांच साल पहले शुरू हुई थी। पहले यहां 7 मशीनें थीं। डेढ़ साल पहले 6 मशीनें और खरीदी गईं। इस तरह कुल 13 मशीनें हो गईं, पर डायलिसिस के लिए सिर्फ 8 मशीनें ही चल पा रही हैं। वजह, मशीनों को चलाने के लिए आरओ का पर्याप्त पानी ही नहीं मिल पा रहा। आरओ प्लांट की क्षमता बढ़ाने में अस्पताल प्रबंधन को डेढ़ साल लग गए। यहां जेपी अस्पताल के साथ ही निजी अस्पतालों से मरीज रेफर होकर आते हैं, पर नए मरीजों को डायलिसिस में लेने की गुंजाइश ही नहीं है। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि आरओ प्लांट लगाने का काम शुरू हो गया है, अगले महीने से सभी मशीनें शुरू हो जाएंगी।

यह है पानी का गणित

एक मरीज की डायलिसिस में 250 से 300 लीटर तक पानी लगता है। सभी मशीनें चलाने के लिए हर दिन कम से कम 2 हजार लीटर पानी की जरूरत है। मौजूदा आरओ प्लांट की क्षमता 500 लीटर प्रति 12 घंटे है। प्लांट उस वक्त लगया गया था, जब सिर्फ तीन मशीनें थीं, अब 13 हैं। आरओ प्लांट को 24 घंटे चलाना पड़ता है, तब 8 मशीनें चल पाती हैं।

जेपी अस्पताल : 13 मशीनों में सिर्फ 5 में हो रही डायलिसिस, मरीज परेशान

जेपी अस्पताल में किसी नए मरीज की डायलिसिस नहीं हो पा रही है। वजह, 13 में से पांच मशीनें डेढ़ साल से कंडम हैं। 3 खराब पड़ी हैं। अस्पताल में अक्टूबर 2011 में तीन मशीनों से डायलिसिस यूनिट शुरू हुई थी। इसके बाद 13 मशीनें हो गईं। मरीज भी बढ़ गए। हर साल करीब ढाई हजार डायलिसिस के साइकल हो रहे थे, पर मशीनें खराब होने से हर दिन 8 से 10 मरीजों की ही डायलिसिस हो पा रही है। सभी मशीनें चलने पर 25-30 मरीजों की डायलिसिस रोज होती थी। बड़ी बात यह है कि पुरानी मशीनें करीब साल भर पहले कंडम हो गई हैं, पर नई मशीनें आज तक नहीं खरीदी गईं।

जेपी अस्पताल के डायलिसिस यूनिट के प्रभारी डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि अभी पांच मशीनें चल रही हैं। मरीजों की संख्या को देखते हुए कुछ और मशीनें लगाने का प्रस्ताव अस्पताल प्रबंधन की तरफ से भेजा गया है।

निजी अस्पतालों में 2 हजार रुपए है खर्च

जेपी और हमीदिया में एक बार डायलिसिस का खर्च करीब 500 रुपए है। यह राशि मरीजों से डायलिसिस के लिए लगने वाले डायलायजर के लिए ली जाती है। निजी अस्पतालों में इसके 2 हजार रुपए लगते हैें।

Related Articles

Back to top button