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CG Election 2018: क्या भाजपा को कार्यकर्ताओं के घर से भी नही मिले वोट!

संवादाता, डॉ एस एस यादव
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी सुनामी ने भाजपा के दावों और रणनीति की पोल भी खोल दी। भाजपा न तो अपना गढ़ बचा पाई, न ही अपने सदस्यों के परिवार के वोट को ही पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में कर पाई। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों पर 47 लाख सात हजार 141 वोट मिले। जबकि भाजपा का दावा था कि प्रदेश में उनके 25 लाख सदस्य हैं। ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा सदस्यों के घर का दो वोट भी नहीं मिल सका।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा अपने सदस्यों के परिवार के वोट को भी अपने पक्ष में करने में फेल रही। आमतौर पर औसतन एक परिवार में चार सदस्य होते हैं। ऐसे में करीब एक करोड़ वोट भाजपा के पक्ष में होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विधानसभा चुनाव में कुल वोट शेयर में भाजपा के पाले में 33 फीसद वोट आया, जबकि छह लाख सदस्यों वाली कांग्रेस के पाले में 43 फीसद वोट पड़ा।
प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच वर्ष 2013 के चुनाव में 0.7 प्रतिशत वोट से बढ़कर अंतर दस फीसद का हो गया है। पिछले चुनाव में 0.7 फीसद के वोट के अंतर से कांग्रेस और भाजपा के बीच दस विधायक कम-ज्यादा थे। इस बार दस फीसद वोट के अंतर में भाजपा के पास सिर्फ 15 और कांग्रेस के 68 विधायक हैं।
राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में राकांपा को सात फीसद वोट मिले थे, लेकिन सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी। इस चुनाव में जकांछ को सात फीसद वोट मिले और पांच सीट जीतने में सफल रही। राकांपा ने दिग्गज कांग्रेसी विद्याचरण शुक्ल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था, तो जकांछ ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा।

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