मध्यप्रदेश के वकीलों ने शुरू किया प्रदर्शन; अदालतों में कामकाज ठप


संवादाता, ज़ीशान मुजीब
भोपाल. बार कौंसिल ऑफ इंडिया के आव्हान पर वकीलों के अधिकारों की रक्षा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता सहित अन्य मांगों को लेकर 12 फरवरी को देश भर के 20 लाख वकील प्रतिवाद दिवस मना रहे हैं। इस दौरान वकील न्यायालयीन कार्य नहीं कर रहे हैं। इसका असर प्रदेश में हाईकोर्ट से लेकर निचली अदालतों तक देखा जा रहा है। अदालतों में कोई कामकाज नहीं हो रहा है। कोर्ट में पेशी पर आ रहे लोग परेशान हो रहे हैं।
स्टेट बार कौंसिल के अध्यक्ष शिवेन्द्र उपाध्याय और स्टेयरिंग कमेटी के संयोजक आदर्शमुनि त्रिवेदी ने बताया कि वकीलों के अधिकारों की रक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संस्थाओं की रक्षा और अधिवक्ताओं की सुरक्षा और कल्याण के लिए पहले भी केन्द्र और राज्य सरकारों को अभ्यावेदन और ज्ञापन दिए जा चुके है, लेकिन सरकारों ने इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की।
बनाया जाएगा दबाव: बार कौंसिल ऑफ इंडिया के आव्हान पर 12 फरवरी को मध्यप्रदेश के सभी अधिवक्ता न्यायालय कार्य से विरत रहकर अपनी मांग पूरी करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मुख्य मांगों में अधिवक्ताओं के बैठने के लिए चेम्बर, हॉल, ई-लायब्रेरी, अधिवक्ता और उनके परिवारों के लिए इंश्योरेंस सुविधा, पेंशन और पांच वर्ष तक स्टायफंड की सुविधा देने की मांग की गई है।
जल्द लागू हो एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट : स्टेट बार कौंसिल के उपाध्यक्ष दिनेश नारायण पाठक, प्रवक्ता राधेलाल गुप्ता और आरके सिंह सैनी ने कहा है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के पहले वचन दिया था कि सत्ता में आते ही एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट, नए अधिवक्ताओं को बैठने की सुविधा और 25 हजार रुपए की सहायता राशि, 5 लाख रुपए मृत्यु दावा, बीमारी में 5 लाख रुपए तक की सहायता और ई-लायब्रेरी की सुविधा दी जाएगी। राज्य सरकार को एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट सहित अन्य मांगों को जल्द पूरा करना चाहिए।



