विशेष संयोग में आई महाशिवरात्रि, अब 12 साल बाद ही बनेगा ये योग


राहतगढ़। 4 वर्षों के बाद महाशिवरात्रि पर्व सोमवार के दिन आया है और ये पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। अगले 12 वर्षों तक महाशिवरात्रि में यह विशेष संयोग नहीं बनेगा। सोमवार के दिन आने से महाशिवरात्रि को विशेष शुभ फलदायी माना जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार जो श्रद्धालु महाशिवरात्रि में पूजा-अर्चना व शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, भोलेनाथ उन्हें मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
पं. रूपकिशोर त्रिवेदी का कहना है कि महाशिवरात्रि पर भक्त शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र और शिव पंचाक्षर मंत्र ऊं नम: शिवाय का जाप कर रहे हैं, इससे उन्हें सुख, समृद्धि एवं शांति प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि जिसका चंद्रमा, शुक्रवार, राहु खराब है उनके लिए महाशिवरात्रि में शिव पूजा विशेष फल देने वाला उत्सव होता है।
दिन तक शुभ कार्यो पर विराम
इस साल 17 जनवरी से शुरू हुए शादी समारोह पर 13 मार्च के बाद ब्रेक लग जाएगा। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी 14 मार्च से होलाष्टक शुरू हो जाएंगे जो 21 मार्च पूर्णिमा तक चलेंगे। होलाष्टक लगने से अगले 7 दिनों में कोई शुभकार्य नहीं हो सकेगा। माना जाता है कि इन दिनों में ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है। सभी 9 ग्रह अष्टमी से पूर्णिमा तक उग्र रहते हैं। पं. त्रिवेदी के मुताबिक सभी शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए ग्रहों का सौम्य होना जरूरी है।
16 अप्रैल से फिर गूंजेगी शहनाइयां
पं. लक्ष्मीनारायण दुबे के अनुसार 15 मार्च को मीन का मलमास लग जाएगा। सूर्य जब गुरु की राशि धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब मलमास लग जाता है। 15 मार्च को सुबह 5.45 बजे सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य मीन राशि में 14 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक रहेंगे। शुभ कार्य 15 अप्रैल से शुरू हो सकेंगे। 16 अप्रैल को फिर से शहनाइयां बजने लगेंगी। 12 जुलाई को देवशयन होगा। इससे फिर 4 माह तक कोई शुभ और मांगलिक कार्य नहीं हो सकेगी। होलाष्टक के दिनों में ग्रहों के उग्र होने की वजह से नया व्यापार, गृह प्रवेश, विवाह, वाहन क्रय, जमीन व मकान की खरीदारी सहित अन्य मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।



