दिल्ली में बैन, पर भोपाल की हवा को जहरीला बना रहे पुराने वाहन


संवाददाता, ज़ीशान मुजीब
भोपाल। राजधानी में धूल का स्तर कम हुआ है, लेकिन प्रदूषण कम नहीं हो रहा है। हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के लिए खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 व पीएम-10 का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ये गैसीय व हैवी मैटल का समिश्रण होते हैं। ये पुराने वाहनों के धुएं से निकलकर वातावरण में फैल रहे हैं। ठंड के सीजन में आगे यह खतरा और बढ़ेगा। परिवहन विभाग के आंकड़ों की मानें तो शहर में 25 हजार से अधिक पुराने वाहन हैं। ऐसे वाहनों पर दिल्ली में बैन लग चुका है। ये वाहन धुएं के साथ बारिक कण पीएम 2.5, कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फर डाइ आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड व ओजन जैसी गैसें छोड़ते हैं।
ऐसे साबित हुआ, धुएं से बढ़ रहा प्रदूषण
सड़कें खराब थीं, धूल उड़कर वातावरण में फैल रही थी। इसके कारण पीए 2.5 व पीएम 10 का स्तर बढ़ा हुआ था। यह स्थिति अक्टूबर के दूसरे सप्ताह की थी। इसके बाद सड़कों की मरम्मत का काम तेज हुआ। मौजूदा स्थिति में धूल कम उड़ रही है, दीपावली के पूर्व व बाद में मौसम बदला है। हल्की बूंदाबांदी भी हुई है। इसके कारण वातावरण में आद्रता बढ़ी है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में धूल उड़ती भी है तो उसके कण आद्रता पाकर भारी हो जाते हैं और जमीन से ज्यादा ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाते।
इसके कारण धूल से फैलने वाला प्रदूषण अपेक्षाकृत रिकार्ड नहीं होता या फिर कम होता है। इसके अलावा शहर के भीतर बड़े उद्योग भी नहीं है, जिन्हें पीएम 2.5 व पीएम-10 के बढ़ते स्तर के लिए जिम्मेदार माना जाए। ऐसे में राजधानी की सड़कों पर दौड़ रहे 25 हजार से अधिक पुराने वाहनों का धुआं ही एकमात्र स्रोत हैं, जिसके कारण सबसे खतरनाक माने जाने वाले पीएम 2.5 का स्तर 500 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच रहा है।
दिनांक 28 29 30 मानक स्तर
पीएम 2.5 500 410 345 60
पीएम 10 476 268 244 100
एनओ 2 72 55 93 40
सीओ 109 69 128 60
ओजोन 43 77 104 60
(नोट : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइड से प्राप्त आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर में हैं।)
दिल्ली में पुराने वाहनों पर बैन
– 10 साल से पुराने पेट्रोल व 15 साल से पुराने डीजल वाहन सड़कों पर नहीं दौड़ सकते। इन पर प्रतिबंध लगा दिया है।
प्रदेश में बैन नहीं
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत प्रदेश में पुराने वाहनों पर बैन नहीं है। गैर कमर्शियल वाहनों को 15 साल चलने के बाद हर 5 साल चलने की अनुमति दी जाती है। जबकि, कमर्शियल वाहनों को हर साल फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। ये तब तक किए जा सकते हैं, जब तक कि वाहन चलने योग्य होता है। हालांकि, संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में पुराने वाहनों पर बैन लगाने का उल्लेख है, लेकिन इसके नियम बनने हैं, जब तक नियम नहीं बन जाते, तब तक बैन नहीं लगाया जा सकता।
70 फीसदी वायु प्रदूषण की वजह यातायात
कुल वायु प्रदूषण का 70 फीसदी सिर्फ यातायात कारणों से होता है। इसमें पुराने वाहन मुख्य हैं, जो हैवी मैटल व हानिकारक गैसें छोड़ते हैं। 5 से 10 फीसदी वाहन तो ऐसे हैं, जो 30-30 सालों से चल रहे हैं। इन पर कभी रोक नहीं लगाई गई है। हर बार ठंड के सीजन में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ता है, जो हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार है। त्वचा व सांस संबंधी रोग भी होते हैं।
– डॉ. सुभाष सी पांडे, पर्यावरणविद्
कार्रवाई करेंगे
पुराने वाहनों के संबंध में कोई स्पष्ट गाइड लाइन नहीं है। जब तक वाहन फिट रहते हैं तब तक चलाने की अनुमति देते हैं। फिर भी प्रदूषण गंभीर समस्या है, ऐसे वाहनों को चिन्हित कर कार्रवाई करेंगे।
– संजय तिवारी, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी



