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विशाखापट्टनम हादसा / नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गैस लीक मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया, एलजी पॉलिमर्स को 50 करोड़ रु. जमा करने को कहा


विशाखापट्टनम. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने विशाखापट्टनम गैस लीक मामले में शुक्रवार को सुनवाई की। ट्रिब्यूनल ने एलजी पॉलिमर्स इंडस्ट्री इंडिया को गैस लीक से हुए नुकसान के एवज में शुरुआती तौर पर 50 करोड़ रुपए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास जमा करने को कहा। इसके साथ इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया। इसका नेतृत्व आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जज करेंगे। ट्रिब्यूनल ने एलजी पॉलिमर्स, पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषर्ण बोर्ड को नोटिस भी जारी किया।
यह सुनवाई आंध्रप्रदेश के एक एनजीओ की याचिका पर हुई। एनजीओ ने इस केस की जांच हाई लेवल कमेटी से करवाने की मांग की थी। उधर, गृह मंत्रालय ने गुरुवार रात को फिर से प्लांट से गैस लीक होने की बात पर सफाई दी। कहा कि यह एक मामूली तकनीकी रिसाव था। कंटेनर को नियंत्रण में लाने के लिए इसकी आवश्यकता होती है। गैस के असर को कम करने की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। हालात काबू में हैं।
रिसाव से 11 लोगों की मौत हुई
एलजी पॉलिमर्स इंडस्ट्री इंडिया का यह प्लांट विशाखापट्टनम से करीब 30 किमी दूर वेंकटपुरम गांव में है। बुधवार रात 2.30 बजे गैस लीक हुई थी। इससे 2 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हुई। गुरुवार रात 11.30 बजे दोबारा गैस का रिसाव की खबर आई। हालांकि, पुलिस ने भी इसे सिर्फ अफवाह बताया। विशाखापट्टनम के पुलिस कमिश्नर आर के मीणा का कहना है कि एहतियात के तौर पर 2 किलोमीटर के दायरे में गांवों को खाली कराया गया है। घटनास्थल से 2 किलोमीटर दूर वाले लोगों को घरों से बाहर आने की जरूरत नहीं है।
प्रशासन के कहा कि प्लांट में गैस रिसाव के बाद हालात पर काबू करने की कोशिशें जारी हैं। गांव के आसपास 2 किमी के दायरे को खाली करा लिया गया है। उधर, गैस के असर को कम करने के लिए गुजरात से केमिकल पैरा टर्शरी ब्यूटाइल केटकॉल (पीटीबीसी) मंगाया गया है। देर रात एयर इंडिया का एक कार्गो प्लेन इसे लेकर विशाखापट्टनम पहुंचा। पीटीबीसी गुजरात के वापी और वलसाड जिले में बनता है। जब इसका हवा में छिड़काव किया जाता है, तो यह किसी भी तरह की गैस के असर को कम कर देता है।
कई लोग बेहोश होकर गिर गए थे
गैस 4 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 5 छोटे गांवों में फैल गई थी। बुधवार सुबह हालात बेहद खराब थे। लोगों के घरों तक गैस घुस गई। लोगों को बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टियां होने के बाद उनकी नींद खुली। कई लोग बेहोश हो गए। गुरुवार सुबह तक वेंकटपुरम गांव से इसी तरह की तस्वीरें सामने आती रहीं। कई लोग खड़े-खड़े बेहोश होकर गिरते नजर आए।
स्टाइरीन गैस लीक हुई; यह फाइबर, रबर, पाइप बनाने में इस्तेमाल होती है
जो गैस लीक हुई, वह पीवीसी यानी स्टाइरीन कहलाती है। यह न्यूरो टॉक्सिन है। इसका केमिकल फॉर्मूला C6H5CH=CH2 होता है। यह सबसे लोकप्रिय ऑर्गनिक सॉल्वेंट बेंजीन से पैदा हुआ पानी की तरह बिना रंग वाला लिक्विड होता है। इसी से गैस निकलती है। यह दम घोंट देने वाली गैस है। यह सांसों के जरिए शरीर में चली जाए तो 10 मिनट में ही असर दिखाना शुरू कर देती है। यह गैस पॉलिस्टाइरीन प्लास्टिक, फाइबर ग्लास, रबर और पाइप बनाने के प्लांट में इस्तेमाल होती है।

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