किसान आंदोलन:सुप्रीम कोर्ट में किसान संगठन ने कहा- बातचीत के लिए बनी कमेटी के मेंबर कृषि कानूनों के समर्थक, इन्हें हटाएं


भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट से कृषि कानूनों पर बात करने के लिए बनाई कमेटी के मेंबर्स को बदलने की मांग की। संगठन का कहना है कि इस कमेटी के लिए ऐसे लोगों को चुना जाए, जो आपसी सामंजस्य के आधार पर काम कर सकते हैं। अभी कमेटी में शामिल किए सदस्य इन कानूनों का समर्थन करते रहे हैं। उनके कमेटी में रहने से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हो सकता है।
एडवोकेट एपी सिंह के जरिए दाखिल किए गए जवाब में संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बहुत खेद के साथ यह जिक्र करना जरूरी है कि इन तीन लोगों को कमेटी का मेंबर बनाकर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन किया जा रहा है। ये सदस्य कैसे किसानों की बात सुनेंगे, जब वे पहले ही इन कानूनों का समर्थन कर चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई थी कमेटी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हुई सुनवाई में चार सदस्यों वाली कमेटी बनाई थी। इसमें किसान नेता भूपिंदर सिंह मान, अनिल घनवट, एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट अशोक गुलाटी और प्रमोद जोशी शामिल किए गए थे। भूपिंदर सिंह ने गुरुवार को अपना नाम वापस ले लिया था।
दिल्ली पुलिस की याचिका खारिज करने की मांग
संगठन ने कोर्ट से दिल्ली पुलिस की याचिका भी खारिज करने की मांग की। याचिका में 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर मार्च या प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई है। पुलिस की दलील है कि इसके जरिए किसान गणतंत्र दिवस के समारोह में रुकावट डाल सकते हैं।
किसानों ने कहा था- लाल किले से रैली निकालेंगे
केंद्र की ओर से लाए गए तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए किसान पिछले 52 दिन से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने शुक्रवार को कहा था कि 26 जनवरी को हम अपनी रैली लाल किले से इंडिया गेट तक निकालेंगे। इसके बाद सभी किसान अमर जवान ज्योति पर इकट्ठा होंगे और वहां तिरंगा फरहाएंगे।
उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक होगा, जहां एक तरफ किसान होंगे और दूसरी तरफ जवान। इसके मद्देनजर पुलिस की चिंता बढ़ गई है। भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे 40 किसान संगठनों में से एक है।



