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आप बर्बाद हो रहे हैं और नरेंद्र मोदी का झूठ बोलना जारी है, रवीश कुमार

कोरोना संक्रमण ने भारत में बेहद विनाशकारी रूप अख्तियार किया हुआ है। रोज 4 लाख से ज्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा भी रोजाना हजारों में रह रहा है। हाल ही में बिहार और यूपी में गंगा नदी में बड़ी संख्या में लाशें तैरती मिली थीं। बताया गया कि ये कोरोना से जान गंवा देने वालों की लाशें हैं।

कोरोना से हो रही मौतों पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर तंज कसा है। रवीश कुमार ने सोशल मीडिया में पोस्ट लिख कहा है कि आपके जान की कोई कीमत नहीं रही, सही में नरेंद्र मोदी ने देश को विश्व गुरु बना दिया है।

रवीश कुमार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा है कि आपकी जान की कीमत दो कौड़ी की नहीं रही। पेट्रोल सौ के पार हो गया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाकई भारत को विश्व गुरु बना दिया है। डरे हुए लोग अपनी जान गंवा बैठे मगर बोल नहीं पाए। जान गंवा नहीं बैठे बल्कि तड़पा-तड़पा कर मारे गए हैं।

रवीश कुमार ने लोगों को भी कटघरे में खड़ा किया है। रवीश कुमार ने लिखा- हर चीज़ को डेटा में बदलने के इस दौर में आपके अपनों की लाश डेटा नहीं है। बहती लाशों को देख कर भी चुप्पी है। आप अपनों के प्रति भी बेईमान निकले। अब किसी की आस्था आहत नहीं हो रही है।

रवीश कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आगे लिखा- आप बर्बादी के बीच खड़े हैं। कगार पर नहीं। लेकिन उसका झूठ बोलना जारी है। उसका चुप रहना भी झूठ बोलना ही है। आप भी अलग नहीं है। इसी झूठ ने सबको पहले ही मार दिया।

रवीश कुमार के इस पोस्ट पर मिली जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। तमाम यूजर्स रवीश से सहमति जता रहे हैं तो कुछ उन्हें सरकार की आलोचना करने के लिए ट्रोल भी कर रहे हैं।

Junaid Ali नाम के एक यूजर ने कमेंट किया- जनता के बड़े प्रतिशत की अंतरात्मा इतनी मूर्छित हो चुकी है कि अब उससे सही-गलत में विभेद करना असंभव सा हो चुका है

एक अन्य यूजर Hanuman Chaudhary ने लिखा- हम महान आर्यावर्त के निवासी लाशें उठा लेंगे। पर इन सबके जिम्मेदार कौन हैं इस पर प्रश्न नहीं उठाएंगे। हमारी इसी कमजोरी,लाचारी और डर ने हमें सदियों गुलाम रखा, और हम आज भी मानसिक रूप से गुलाम है, धर्म,जाति, क्षेत्रवाद के। अंग्रेज सही ही कहते थे भारतीय अभी लोकतंत्र को संभालने के लिए परिपक्व नहीं है। और यकीनन हम आजादी के 70 वर्षों में भी लोकतंत्र को केवल चुनाव का पर्याय समझ लिया है लोकतंत्र की मूल आत्मा को हम आज तक नहीं जान पाए है।

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