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भोपाल में आलमी तब्लीगी इज्तिमा 8 दिसंबर से: मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते एक महीने बाद होगा इज्तिमा

भोपाल में आलमी तब्लीगी इज्तिमा 8 दिसंबर से: मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते एक महीने बाद होगा इज्तिमा

राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी में 8 दिसंबर से आलमी तब्लीगी इज्तिमा शुरू होगा। इनमें देश-विदेश की जमातें शामिल होंगी। 8 से 11 दिसंबर के बीच करीब 10 लाख से अधिक मुस्लिम जुटेंगे। यह दुनिया के चार बड़े मजहबी समागम में एक है। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते इस बार इज्तिमा एक महीने बाद लगेगा। इसमें पाकिस्तानी जमातों पर पाबंदी रहेगी। इज्तिमा में मुस्लिम धर्मगुरु तकरीरें (प्रवचन) करेंगे।

दिल्ली मरकज से इज्तिमा की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। इज्तिमा का आगाज 8 दिसंबर को जुमा की नमाज के साथ होगा। चार दिन चलने वाले इस कार्यक्रम का समापन 11 दिसंबर को दुआ-ए-खास के साथ होगा। आलमी तब्लीगी इज्तिमा के प्रवक्ता अतीक उल इस्लाम ने बताया कि इस चार दिवसीय धार्मिक समागम को संबोधित करने के लिए देश के बड़े उलेमा तशरीफ लाएंगे। आयोजन में देश-विदेश की सैंकड़ों जमातें शामिल होंगी। उन्होंने बताया, लगातार बढ़ रही जमातियों की तादाद के लिहाज से अंदाज लगाया जा रहा है कि इस साल इज्तिमा में 10 लाख से ज्यादा लोग शिरकत करेंगे। प्रवक्ता इस्लाम ने बताया कि आयोजन की तैयारियों का दौर जल्दी ही शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए ईंटखेडी घासीपुरा स्थित इज्तिमागाह की सफाई, पाइप लाइन आदि के कामों को पहले किया जाएगा। इसके बाद सड़क, बिजली, पानी और पांडाल आदि लगाने के काम शुरू किए जाएंगे। विभिन्न तैयारियों के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों को चिट्ठी भेजी जा रही है।

पिछले साल इज्तिमा की बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थी।

दुनिया के बड़े समागम में शामिल
भोपाल में होने वाला आलमी तब्लीगी इज्तिमा दुनिया के सबसे बड़े चार धार्मिक समागम में शामिल किया जाता है। सबसे बड़ा मजमा हज के दौरान मक्का और मदीना में होता है। जहां करीब 40 लाख लोग जमा होते हैं, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान में होने वाले आलमी तब्लीगी इज्तिमा में शामिल होने वाली जमातों की तादाद के लिहाज से बड़े आयोजन माने जाते हैं। भोपाल में आलमी इज्तिमा का यह 77वां साल होगा।

पाकिस्तान की जमात पर पाबंदी
आलमी तब्लीगी इज्तिमा में दुनियाभर की जमातें शामिल होती हैं। इनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, बांग्लादेश, साउथ अफ्रीका, जार्डन, अफगानिस्तान, कनाडा, अमेरिका आदि देश शामिल होते हैं, लेकिन पाकिस्तान से बिगड़े ताल्लुकात के चलते पिछले कई सालों से यहां की जमातों पर पाबंदी लगा दी गई है। अतीक उल इस्लाम ने बताया कि यह पाबंदी इस साल भी जारी रहेगी।

भोपाल में ऐसे शुरू हुआ इज्तिमा
इज्तिमा अरबी भाषा का शब्द है। इसका मतलब कई लोगों का एक जगह पर इकट्ठा होना है। भोपाल में इज्तिमा की शुरुआत 1947 में मस्जिद शकूर खां में महज 12 या 14 लोगों के साथ की गई थी। इसके 2 साल बाद इसे ताजुल मस्जिद में किया जाने लगा। जब इसमें आने वाले लोगों की संख्या लाखों में होने लगी और मस्जिद कैम्पस छोटा लगने लगा। फिर इसे साल 2015 में बैरसिया रोड स्थित ईंटखेड़ी के पास घासीपुरा में शिफ्ट कर दिया गया। तब से यह यहीं पर लगाया जा रहा है।

पिछले साल 10 लाख से अधिक लोग हुए थे शामिल
इज्तिमे में पिछले साल 10 लाख से अधिक लोग शामिल हुए थे। इनके खाने-पीने और रहने की बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थीं। इस बार भी 10 लाख लोगों के हिसाब से ही तैयारियां भी की जाएंगी।
कोरोना की वजह से दो साल नहीं हुआ था आयोजन
कोरोना के चलते वर्ष 2020 और 2021 में आलमी तब्लीगी इज्तिमे का आयोजन नहीं हो सका था।

विशेष संवाददाता, ज़ीशान मुजीब

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