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राहुल गांधी और सुसाइड करने वाले कारोबारी मनोज परमार के बच्चों के बीच फोन पर हुई बातचीत

राहुल गांधी और सुसाइड करने वाले कारोबारी मनोज परमार के बच्चों के बीच फोन पर हुई बातचीत

शनिवार को मध्य प्रदेश के आष्टा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक दिल दहला देने वाली घटना का खुलासा किया। पटवारी ने मनोज परमार के बच्चों से फोन पर राहुल गांधी की बातचीत कराई।

यह घटनाक्रम मनोज परमार की आत्महत्या से जुड़ा हुआ था, जो बीजेपी के दबाव में आकर इस घातक कदम को उठाने के लिए मजबूर हो गए थे। राहुल गांधी से बातचीत में परमार के बच्चों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और उनसे उम्मीद जताई कि वह उनके पास एक बार जरूर आएंगे।
बातचीत की शुरुआत
राहुल गांधी ने पहले परमार के बेटे से बात की। राहुल ने पूछा, “हैलो, कैसे हो बेटा?” परमार के बेटे ने जवाब दिया, “मैं बढ़िया हूं सर, आप कैसे हैं?” इस पर राहुल गांधी ने कहा, “मैंने ये बहुत खराब चीज सुनी, क्या हुआ?” परमार के बेटे ने बताया कि बीजेपी की तरफ से लगातार दबाव बन रहा था कि वे बच्चों को बीजेपी में शामिल करवा लें, लेकिन पापा ने यह सब देखकर आत्महत्या कर ली। इस पर राहुल गांधी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “उफ्फ! और मम्मी ने भी?”
परमार के बेटे ने जवाब दिया, “जी सर, पापा-मम्मी दोनों ने…।” इस पर राहुल गांधी ने सवाल किया, “और आपको कुछ नहीं पता था?” परमार के बेटे ने कहा, “नहीं सर, हमें कुछ भी नहीं पता था। बार-बार ईडी की तरफ से दबाव था कि बच्चों को बीजेपी में शामिल करवा दो।”
परमार के बच्चों की उम्मीद, क्या आएंगे राहुल गांधी

इस बातचीत के बाद राहुल गांधी ने परमार की बेटी से बात की। बेटी ने राहुल से कहा, “हमने आपसे कभी कुछ नहीं मांगा। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी कुछ नहीं बोला, लेकिन अब हम आपसे यह मांगते हैं कि आप एक बार हमारे पास आएंगे न?” राहुल गांधी ने उन्हें सांत्वना दी, “घबराओ मत, हम इस स्थिति का समाधान करेंगे।”
जीतू पटवारी ने राहुल गांधी को बताया कि परमार के परिवार ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें बच्चों को बीजेपी में शामिल करने के दबाव की बात कही गई थी। पटवारी ने राहुल को यह भी बताया कि शुक्रवार सुबह वह परमार के परिवार से मिलने के लिए आष्टा पहुंचे थे और अभी तक परिवार का अंतिम संस्कार चल रहा था।

भोपाल 100 किलोमीटर दूर है आष्टा- पटवारी
जीतू पटवारी ने राहुल गांधी को परमार परिवार के हालात के बारे में बताते हुए कहा, “यहां से भोपाल 100 किलोमीटर दूर है, लेकिन अगर शेड्यूल बन सके तो हम बच्चों को आपके पास लेकर आएंगे।” इसके बाद पटवारी ने यह भी बताया कि परमार के परिवार में एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें यह उल्लेख था कि परिवार को बीजेपी और ईडी से दबाव झेलना पड़ रहा था।
राहुल गांधी ने पूछा, “अंतिम संस्कार और बाकी सब कब खत्म होगा?” पटवारी ने कहा, “11 दिन तक यह प्रक्रिया चलती है और फिर 45 दिन तक परिवार घर से बाहर नहीं निकलता।” इस पर राहुल ने सहमति जताई कि वह बच्चों से मिलकर उन्हें समर्थन देंगे।
परमार की बेटी ने राहुल गांधी से कहा, “आप बस एक बार हमारे पास आ जाइए।” इस बातचीत से यह साफ हो गया कि परिवार को राहुल गांधी से बड़ी उम्मीदें हैं और वे चाहते हैं कि वह उन्हें इस मुश्किल घड़ी में सहारा दें।

लोकसभा में मुद्दा उठाए पप्पू यादव
इस मामले का जिक्र बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा में भी किया। उन्होंने आष्टा के कारोबारी मनोज परमार और उनकी पत्नी की आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि इस परिवार को ईडी और बीजेपी से भारी दबाव का सामना करना पड़ा था। पप्पू यादव ने सदन में ये पंक्तियां पढ़ी:
“अब कानून किताबों में सजा हुआ है, राजनीति का सच हर घर जला हुआ है,
हर जश्न के पीछे किसी की चीखें हैं, और हर झंडे के नीचे दिल डरा हुआ है।
उनकी तिजोरियां भर रही थीं, हम रोटी के टुकड़ों पर जंग लड़ रहे थे,
जो चुनकर भेजे थे हमें बचाने को, वही हमारी गर्दन को मरोड़ रहे थे।”
पप्पू यादव ने अखबारों के माध्यम से सदन में यह जानकारी दी कि परमार के बच्चों ने कहा था कि ईडी के अधिकारियों ने उन्हें कांग्रेस जॉइन करने और राहुल गांधी के खिलाफ बयान देने का दबाव डाला था। बच्चों ने आरोप लगाया कि इसके बाद ही उन्हें “फ्री” किया जाएगा। यह आरोप मध्यप्रदेश के आष्टा इलाके में राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक उत्पीड़न की गंभीरता को उजागर करता है।
राहुल गांधी की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में राहुल गांधी का दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से सहानुभूतिपूर्ण था। उन्होंने परमार के बच्चों से फोन पर बात की और उन्हें दिलासा दी कि वह उन्हें जल्द से जल्द मिलने का प्रयास करेंगे और उनकी मदद करेंगे। यह घटना न केवल एक परिवार की दुखद स्थिति को दर्शाती है, बल्कि राजनीति और प्रशासन द्वारा उत्पीड़न की गंभीरता को भी उजागर करती है।

विशेष संवाददाता, ज़ीशान मुजीब

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