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एक देश एक चुनाव’ लागू होने से क्या-क्या बदलेगा, पढ़ लें हर नियम

एक देश एक चुनाव' लागू होने से क्या-क्या बदलेगा, पढ़ लें हर नियम

देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाला एक संविधानिक संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया जाना है। इसके बाद इसे दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा जा सकता है।

यह 129वां संविधान संशोधन विधेयक है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व वाली उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसा के बाद ही इस विधेयक को लाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की अवधारणा के क्रियान्वयन के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक को 12 दिसंबर को मंजूरी दे दी थी। आइए जानते हैं कि आखिर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ कानून बनने के बाद देश में क्या-क्या बदल जाएगा।

इस विधेयक में क्या है

विधेयक में पहली बात लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ में कराने की है। इसके अलावा इन चुनावों के साथ नगर निकायों और पंचायत के चुनाव भी कराए जाएंगे। इसके अलावा जिन राज्यों की विधानसभा के चुनाव आम चुनाव के बाद होने हैं उनका भी कार्यकाल घटा दिया जाएगा और आम चुनाव के साथ ही विधानसभा के भी चुनाव करा दिए जाएंगे। पंचायत और नगर निकायों के चुनाव साथ कराने के लिए विधेयक में आर्टिकल 324ए को शामिल किया जाएगा।

क्या होगा अगर गिर जाए राज्य की सरकार

विधेयक में इस बात का भी प्रावधान होगा कि अगर अविश्वास प्रस्ताव या अन्य कारण से बीच में ही किसी राज्य की सरकार गिर जाएगी तो क्या किया जाएगा। ऐसी स्थिति में मध्यावधि चुनाव कराए जा सकते हैं लेकिन नई विधानसभा का कार्यकाल केवल अगले लोकसभा चुनाव तक ही होगा। इसके अलावा विधेयक में चुनाव आयोग को भी निर्देश दिए गए हैं कि साथ में चुनाव कराने को लेकर आवश्यक जरूरतें पूरी की जाएं। ईवीएम और वीवीपैट का भी इंतजाम एकसाथ चुनाव कराने से पहले ही कर लिया जाए।

‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विधेयक की खास बातें

13 दिसंबर को सामने आई विधेयक की कॉपी के मुताबिक अगर लोकसभा या फिर विधानसभा को बीच में भंग करना पड़ता है तो मध्यावधि चुनाव पांच साल में बाकी बचे समय के लिए ही करवाया जाएगा। विधेयक मे आर्टिकल 82 (A), 172 और 327 को शामिल करने का प्रस्ताव है। 82A में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ कराने का प्रावधान है। इसके अलावा आर्टिकल 83 में संसद के सदनों के कार्यकाल का प्रावधान है। आर्टिकल 327 में विधानसभा चुनाव को लेकर संसद के नियम बनाने के अधिकार के बारे में बताया गया है।

आम चुनाव के बाद राष्ट्रपति ही करेंगे ऐलान

विधेयक में कहा गया है कि आम चुनाव के बाद राष्ट्रपति ही ऐलान करेंगे कि एक साथ चुनाव कबसे करवाए जाएंगे। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव पहले की ही तरह करवाए जाएंगे। इसके बाद राष्ट्रपति लोकसभा की पहली बैठक के दौरान ऐलान करेंगे कि 2034 से विधानसभा और लोकसभा के चुनाव साथ में करवाए जाएंगे। विधेयक को पास कराने के लिए सरकार को 361 सांसदों के समर्थन की जरूरत है।

लोकसभा की मौजूदा संख्या 542 है। एनडीए के सांसदों के अलावा सरकार को वाईएसआरसीपी, बीजू जनता दल और एआईएडीएमके के सांसदों के समर्थन की भी जरूरत पड़ेगी। वहीं राज्यसभा में फिलहाल 231 सदस्य हैं। ऐसे में बिल के समर्थन में 154 सांसद होने चाहिए। राज्यसभा में एनडीए के पास 114 सांसद हैं। इंडिया गठबंधन के 86 और अन्य दलों के 25 सांसद राज्यसभा में हैं।

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