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बंगाल / भाजपा को 18 सीटें; शाह की रैली के बाद 9 सीटों पर वोटिंग हुई, वहां तृणमूल को फायदा


कोलकाता/भुवनेश्वर. 17वीं लोकसभा चुनाव के लिए मतगणना जारी है। पश्चिम बंगाल की 42 में से 26 सीटों पर नतीजे आ चुके हैं। इनमें से तृणमूल कांग्रेस ने 15, जबकि भाजपा ने 11 सीटें जीती हैं। तृणमूल 7, भाजपा 7 और कांग्रेस 2 सीटों पर आगे चल रही हैं। खास बात यह है कि अमित शाह की हिंसा प्रभावित कोलकाता रैली के बाद जिन 9 सीटों पर वोटिंग हुई, उनमें से 6 पर तृणमूल कांग्रेस जीत चुकी है और 3 पर आगे है। वे 9 सीटें दमदम, बारासात, कोलकाता दक्षिण, कोलकाता उत्तर, मथुरापुर, जाधवपुर, बसीरहाट, जयनगर, डायमंड हार्बर हैं। शाह की रैली में हुई हिंसा के चलते चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाए थे। उसने सातवें चरण के लिए चुनाव प्रचार को एक दिन पहले ही खत्म कर दिया था।
भाजपा पिछली बार यहां सिर्फ 2 सीटें ही जीत पाई थी। तृणमूल 2011 से बंगाल की सत्ता में है। उसने 2014 में प्रदेश की 42 लोकसभा सीटों में से 34 पर जीत हासिल की थी। ओडिशा में बीजद के नवीन पटनायक 2000 से मुख्यमंत्री हैं। बीजद ने 2014 में यहां 21 में से 20 लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाया था। एक सीट भाजपा के खाते में गई थी।

पहली बार चुनाव मैदान पर उतरीं अभिनेत्री मिमि चक्रवर्ती 2 लाख 95 हजार से ज्यादा वोटों से जीतीं
दमदम से तृणमूल के सौगत रॉय चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी भाजपा के सामिक भट्टाचार्य को 53002 मतों से हराया। वे 2014 में भी तृणमूल के टिकट पर यहां चुनाव जीते थे। हालांकि, तब उनकी जीत का अंतर 154934 था।
कोलकाता दक्षिण पर तृणमूल की माला रॉय ने भाजपा के चंद्र कुमार बोस को 1 लाख 55 हजार 192 वोटों से हराया। यह सीट 2014 में भी तृणमूल के ही खाते में गई थी। तब सुब्रत बख्सी यहां से जीतने में सफल रहे थे।
बारासात सीट पर तृणमूल की डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा के मृणाल कांति देवनाथ को 109983 से हराया। डॉ. काकोली तृणमूल के टिकट पर 2014 में भी इसी सीट से सांसद बनी थीं।
कोलकाता उत्तर से तृणमूल के सुदीप बंदोपध्याय जीत गए हैं। उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी भाजपा के राहुल बिश्वजीत सिन्हा को 127095 मतों के अंतर से हराया। सुदीप 2014 में भी इसी सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे।
मथुरापुर से तृणमूल के मोहन जटवा चौधरी ने भाजपा के श्याम प्रसाद हलदर को 203974 मतों के अंतर से हराया। वे 2014 में इसी सीट पर 138768 वोटों से जीते थे।
जाधवपुर से तृणमूल की मिमि चक्रवर्ती चुनाव जीत गईं हैं। उन्होंने भाजपा के अनुपम हाजरा 295239 वोटों से हराया। 2014 में भी यह सीट तृणमूल के पास थी। तब सुगता बोस जीते थे।
बशीरहाट से तृणमूल की नुसरत जहां रूही भाजपा के सायांतन बसु से 3 लाख 50 हजार से ज्यादा वोटों से आगे हैं। नुसरत और मिमि दोनों ही अभिनेत्रियां हैं। उन्होंने इस चुनाव से राजनीति में कदम रखा है।
डायमंड हार्बर से तृणमूल के अभिषेक बनर्जी भाजपा की नीलांजना रॉय से 3 लाख 20 हजार से ज्यादा वोटों से आगे हैं।
जयनगर से तृणमूल की प्रतिमा मंडल ने भाजपा के डॉ. अशोक कंडारी से 3 लाख 16 हजार से ज्यादा मतों से आगे हैं।
बंगाल में हर चरण में हिंसा, इसके बाद भी 82% मतदान
बंगाल में 7 चरणों में चुनाव हुए। यहां हर चरण में हिंसा हुई। इसके बावजूद यहां 81.94% मतदान हुआ। हालांकि, यह आंकड़ा 2014 के मुकाबले कम है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां 82.2% वोट पड़े थे। ओडिशा में 73.1% वोटिंग हुई, जबकि 2014 में 73.8% मतदान हुआ था।

भाजपा ने अपने फायरब्रांड नेता विजयवर्गीय को सौंपी चुनाव की कमान
इस बार भाजपा ने बंगाल और ओडिशा में आक्रामक चुनाव प्रचार की रणनीति अपनाई। उसने बंगाल में चुनाव की कमान अपने फायरब्रांड नेता कैलाश विजयवर्गीय को सौंपी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी इन दोनों राज्यों में प्रचार किया। मोदी ने 50 दिन में देशभर में 142 चुनाव रैलियां कीं। इनमें से उनकी बंगाल में 17 और ओडिशा में 8 रैलियां शामिल हैं। शाह ने कोलकाता में रोड शो किया। उनको जाधवपुर में भी रैली करनी थी, लेकिन वहां उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली।

भाजपा के बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल की मुनमुन सेन को हराया
बंगाल की आसनसोल सीट पर भाजपा के बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल की मुनमुन सेन को 197637 मतों से हराया। वे 2014 में भी भाजपा के टिकट पर यहीं से जीते थे। अभिनेत्री मुनमुन सेन 2014 में बांकुरा से जीती थीं।
हुगली से भाजपा की लॉकेट चटर्जी चुनाव जीत गईं हैं। उन्होंने तृणमूल की डॉ. रत्ना डे नाग को 73362 मतों से हराया। 2014 में डॉ. रत्ना डे नाग तृणमूल के टिकट पर यहां से सांसद चुनी गईं थीं।
बर्धमान-दुर्गापुर सीट पर भाजपा के एसएस अहलूवालिया ने तृणमूल की डॉ. ममताज संघमिता को 2439 मतों से हरा दिया। अहलूवालिया 2014 में भाजपा के टिकट पर दार्जिलिंग लोकसभा सीट से चुनकर संसद पहुंचे थे। ममताज 2014 में तृणमूल के टिकट पर इसी सीट से चुनी गईं थीं।
दार्जिलिंग से भाजपा के राजू बिष्ट ने जीत हासिल की। उन्होंने तृणमूल के अमर सिंह रॉय को 413443 मतों के अंतर से हराया।
बालुरघाट से भाजपा के सुकांता मजूमदार ने तृणमूल की अर्पिता घोष को 33293 वोटों से हराया। अर्पिता 2014 में इसी सीट से चुनकर संसद पहुंची थीं।
बीरभूम से तृणमूल की शताब्दी रॉय ने भाजपा के दूध कुमार मंडल को 88924 मतों के अंतर से हराया। उन्होंने 2014 में तृणमूल के टिकट पर 67263 मतों के अंतर से यह सीट जीती थी।
अलीपुरद्वार से भाजपा के जॉन बरला तृणमूल के दशरत तिर्की से 2 लाख 38 हजार से ज्यादा मतों से आगे चल रहे हैं।
आरामबाग से तृणमूल की अपूर्वा पोद्दार भाजपा के तपन कुमार रॉय से 2200 से ज्यादा मतों से आगे चल रही हैं।
बहरामपुर से कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी तृणमूल के अपूर्व सरकार से 78 हजार से ज्यादा मतों से आगे चल रहे हैं।
जलपाईगुड़ी से भाजपा के डॉ. जयंत कुमार रॉय तृणमूल के बिजोय चंद्र बर्मन से 1 लाख 76 हजार से ज्यादा मतों से आगे चल रहे हैं।
पुरी : संबित पात्रा से पिनाकी मिश्रा आगे
ओडिशा की पुरी लोकसभा सीट से बीजद के पिनाकी मिश्रा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा से आगे चल रहे हैं। यह सीट पिछले 40 साल से जनता दल और फिर बीजद के पास है।

बीजद के अनुभव मोहंती भाजपा के बैजयंत पांडा से आगे
ओडिशा की केंद्रपाड़ा सीट से बीजद के अनुभव मोहंती भाजपा के बैजयंत पांडा से आगे चल रहे हैं। पांडा कभी नवीन पटनायक के करीबी माने जाते थे। वे यहां से बीजद के टिकट पर दो बार चुनाव भी जीत चुके हैं। इस बार चुनाव से पहले वे बीजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
सुंदरगढ़ से भाजपा के जुएल उरांव बीजद की सुनीता बिस्वाल से 2 लाख 15 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं। जुएल 2014 में भाजपा के टिकट पर इसी संसदीय क्षेत्र से चुने गए थे।
भुवनेश्वर से भाजपा की अपराजिता सारंगी बीजद के अरुप मोहन पटनायक से 14 हजार से ज्यादा मतों से आगे चल रही हैं।
कटक से बीजद के भर्तृहरि महताब भाजपा के प्रकाश मिश्रा से 68 हजार से ज्यादा मतों से आगे चल रहे हैं।
कालाहांडी से भाजपा के बसंत कुमार पांडा बीजद के पुष्पेंद्र सिंह देव से 20 हजार से ज्यादा मतों से आगे चल रहे हैं।

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