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अब अग्निपरीक्षा:कमलनाथ 15 माह बनाम शिवराज 5 माह; 3 नवंबर को मतदान, 10 नवंबर को बिहार के साथ ही आएंगे नतीजे


प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार के पांच माह और कमलनाथ की पूर्व सरकार के 15 माह के कार्यकाल की अग्निपरीक्षा का समय आ गया है। चुनाव आयोग ने मंगलवार को मध्यप्रदेश की 28 सीटों समेत 12 राज्यों की 56 विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के लिए उप चुनावों की तारीख का ऐलान कर दिया। प्रदेश में वोट 3 नवंबर को डाले जाएंगे। वोटों की गिनती 10 नवंबर को होगी और उसी दिन चुनाव के नतीजे आ जाएगें।
उपचुनाव की घोषणा के साथ ही तत्काल प्रभाव से चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो गई है। भाजपा को सरकार में बने रहने के लिए 9 सीटों की और जरूरत होगी। वहीं, कांग्रेस को सत्ता में वापसी के लिए सभी 28 सीटें जीतना जरूरी होगा। इन चुनावों में भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी प्रतिष्ठा दाव पर लगी है, क्योंकि सर्वाधिक 16 सीटें उनके प्रभाव वाले ग्वालियर-चंबल अंचल में है। ये सीटें जीतने पर ही सरकार की स्थिरता तय होगी। मप्र के इतिहास में पहला मौका है जब यहां 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इसकी वजह कांग्रेस के 25 विधायकों के सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद भाजपा में शामिल होना है।
इन्हीं के इस्तीफे की वजह से कांग्रेस की सरकार गिर गई थी, 3 उप चुनाव सदस्यों की मृत्यु होने से रिक्त हुई सीटों पर हो रहे हैं। इससे पहले दसवीं विधानसभा के कार्यकाल में (13-14 अक्टूबर 1996) को 10 सीटों पर उपचुनाव हुआ था।
चुनाव गाइड लाइन- वोट डालने के लिए मतदाताओं को दिए जाएंगे मास्क, हैंड ग्लव्ज और सैनिटाइजर
चुनाव आयोग ने 62 लाख मतदाताओं के लिए वोट डालने के लिए बनाए गए 9361 मतदान केंद्रों पर मास्क, हैंड ग्लव्ज और सैनिटाइजर तथा हाथ धोने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 50 करोड़ का बजट रखा गया है।
मतदाताओं की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। पहली बार में वोटर का टेम्प्रेचर मानक से अधिक होने पर दूसरी बार जांच की जाएगी। टेम्प्रेचर फिर भी ज्यादा रहा तो ऐसे मतदाताओं को टोकन दिया जाएगा और उनसे कहा जाएगा कि वह मतदान के अंतिम घंटे में आए और उनसे कोविड-19 के प्रतिरोधक का पालन करते हुए वोट करवाया जाएगा।
मतदान केंद्र पर सक्रमण न फैले इसके लिए मेडिकल वेस्ट मटेरियल को इकट्‌ठा कर उसके डिस्पोजल का इंतजाम होगा।
14 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर
कांग्रेस के 25 पूर्व विधायकों के इस्तीफे से सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ सरकार गिर गई। बाद में ये सभी भाजपा में शामिल हो गए तब इनमें से भाजपा ने 14 को मंत्री पद से नवाजा। इन उप चुनावों में इन बगैर विधायकी के मंत्री बने मंत्रियों की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है। खास यह है कि 20 अक्टूबर को मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट का मंत्रिपद खत्म हो जाएगा। 3 नवंबर के ये दोनों बगैर मंत्री रहे मैदान में होंगे।
इन 14 मंत्रियों में इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, हरदीप सिंह डंग, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंसाना, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, ओपीएस भदौरिया और गिर्राज दंडोतिया शामिल हैं।
कांग्रेस के 24 प्रत्याशी घोषित, भाजपा के 27 नाम संभावित

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