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ईरान ने इजरायल को हद में रहने की दी नसीहत

ईरान ने इजरायल को हद में रहने की दी नसीहत

इस्राइल के हमास के विरुद्ध जवाबी हमलों से गाजापट्टी के हालात दयनीय होते जा रहे हैं। बिजली-पानी की आपूर्ति ठप हो गई है। अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं हैं। कहा गया है कि ये बुनियादी आपूत्तिर्यां बहाल न की गई तो हजारों की तादाद में घायल एवं सामान्य लोग ला-इलाज मर जाएंगे। इस पर गाजापट्टी के उत्तरी हिस्से से लाखों लोगों को दक्षिणी हिस्से में चले जाने का इस्राइली फरमान विस्थापन की भयानक त्रासदी रचने वाला है। एक सामान्य आकलन है कि सात अक्टूबर को बिना उकसावे के हमास के चौतरफा हमलों में इस्राइल को जानमाल का जितना नुकसान हुआ है, उसकी तुलना में फिलिस्तीनियों की अधिक क्षति हुई है।
लाइव रिपोर्टिग में यह दिख भी रहा है कि इस्राइल ने पलड़ा अपने पक्ष में झुका दिया है, लेकिन उसके बम केवल हमास आतंकवादियों और उनके पनाहगाहों पर ही नहीं गिर रहे।

वे निर्दोषों को भी मार रहे हैं। ऐसा कर इस्राइल युद्ध का परिभाषित दायरा तोड़ रहा है। हालांकि यह दायरा हर जंग में ताकतवर देश के हिसाब से टूटता है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पहले की जंग में भी ऐसा होता रहा है-जापान पर अमेरिका के परमाणु हमले ही कौन से अनुमोदित थे।
फिर भी, जंग को सेना-सेना तक या दोषियों पर हमले तक ही सीमित रखे जाने पर सहमति है। इसलिए विश्व की तटस्थ प्रतिक्रियाओं में इस्राइल के प्रति एक झुंझलाहट देखने-सुनने को मिल रही है। रूस और चीन ने उससे युद्ध के मानकों के उल्लंघन की इजाजत नहीं दिए जाने और निदरेषों की जान जाने को सहन नहीं करने की बात कही है।
ईरान ने तो सीधे दखल देने की धमकी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन को लग रहा है कि इस्राइल की इन कार्रवाइयों का नैतिक बचाव करना उनके लिए भी मुश्किल हो जाएगा तो उन्होंने भी इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को हद में रहने की सलाह दी है। संघर्ष से किसी को फायदा नहीं है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है।
ऐसा उन्होंने रूस से भी कहा था। हालांकि ऐसा होता दिखता नहीं। इसलिए कि इस्राइल हमास को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। वह इसके हिमायती हिज्जबुल्लाह से लेबनान में लड़ रहा है। अब जैसी परिस्थितियां बन रही हैं, उनमें युद्ध के और फैलने की ही आशंका है। अगर अरब या दुनिया के अन्य देश इसमें कूद पड़े तो स्थिति विकट हो जाएगी। यह घटित न होने देने के लिए विश्व समुदाय को दोनों पक्षों के दावों पर बिंदुवार विचार कर शांति-प्रयास करना चाहिए। इसमें भारत समेत तटस्थ देशों की महती भूमिका हो सकती है।

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