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Nursing collage scam: मध्यप्रदेश में सरकार का बड़ा फैसला, बंद होंगे अपात्र नर्सिंग कॉलेज, आयुक्त ने कलेक्टरों को लिखा पत्र

Nursing collage scam: मध्यप्रदेश में सरकार का बड़ा फैसला, बंद होंगे अपात्र नर्सिंग कॉलेज, आयुक्त ने कलेक्टरों को लिखा पत्र

भोपाल: मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने नर्सिंग फर्जीवाड़े में शामिल उन अधिकारी-कर्मचारियों के नाम चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया है, जिन्होंने कॉलेजों का निरीक्षण किया था।

इन्हीं की रिपोर्ट के आधार पर 2020-21 के सत्र में कॉलेजों को मान्यता मिली थी। निरीक्षण करने वाली टीमों में राजस्व अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग की नर्सिंग शाखा के कर्मचारी, नर्सिंग काउंसिल के कर्मचारी शामिल थे।

2020-21 में सबसे अधिक गड़बड़ी

प्रदेश में सबसे अधिक गड़बड़ी 2020-21 के सत्र में हुई थी। सर्वाधिक 220 नए कॉलेज इसी सत्र में खुले थे। 2021-22 में 49 कॉलेजों को खोलने की अनुमति नर्सिंग काउंसिल ने दी थी। इसके अतिरिक्त अपात्र कालेजों को बंद किया जा रहा है। आयुक्त चिकित्सा शिक्षा तरुण पिथौड़े ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर ऐसे अपात्र कॉलेजों को बंद कराने के लिए कहा है।

386 कॉलेजों की जांच सीबीआई को सौंपी

दरअसल, ला स्टूडेंट एसोसिएशन की याचिका पर हाई कोर्ट ने पहले चरण में 368 कॉलेजों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआइ ने इनमें 66 कालेजों को अनुपयुक्त बताया है। यानी, इन कालेजों में संसाधन नर्सिंग काउंसिल के निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं मिले थे।

कुछ कॉलेज विद्यार्थियों को एडमिशन दे रहे

चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की जानकारी में आया है कि इनमें कुछ कॉलेज अभी भी विद्यार्थियों को प्रवेश दे रहे हैं, इसलिए इन्हें बंद कराया जा रहा है। साथ ही नर्सिंग एवं मिडवाइफरी कमीशन के गठन का काम भी तेज हो गया है। यह आयोग बनाने की कवायद पिछली सरकार के समय से चल रही थी, पर हाल ही में नर्सिंग कॉलेजों द्वारा अपने पक्ष में रिपोर्ट बनवाने के लिए सीबीआई अधिकारियों को रिश्वत लेने-देने का भंडाफोड़ होने के बाद गठन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जल्द ही इसका प्रस्ताव स्वीकृति के लिए कैबिनेट में लाया जाएगा। यह आयोग कॉलेजों का निरीक्षण, मान्यता और परीक्षा संचालन का काम करेगा।

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