विधायक माखनलाल जाटव हत्याकांड में पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य को क्लीन चिट


भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल की एमपी-एमएलए मामलों के लिए गठित विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य को हत्या के मामले में क्लीन चिट दे दी है। विशेष न्यायाधीश सुरेश सिंह ने शनिवार को हाईकोर्ट द्वारा भिंड की जिला अदालत के फैसले को खारिज कर एमपी-एमएलए कोर्ट को उन्हें क्लीन चिट देने के निर्देश दिए थे। अदालत में निर्णय सुनाए जाते समय पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य भी मौजूद थे। 6 आरोपितों के खिलाफ हत्या के मामले की सुनवाई अब भिंड की विशेष अदालत में होगी। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के प्रत्याशी भागीरथ प्रसाद के पक्ष में ग्राम हरेंटा में एक जनसभा आयोजित की गई थी। सभा को कांग्रेस विधायक माखनलाल जाटव द्वारा संबोधित किया गया था। माखनलाल जब सभा स्थल से वापस जाते हुए लोगों से जनसंपर्क कर रहे थे तभी उनके ऊपर दो फायर किए गए। एक गोली माथे में कान के पास आकर लगी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में मेवाराम शर्मा, रामरूप सिंह, शेर सिंह, केदार सिंह, गंधर्व सिंह और सेठी कौरव को हत्या व षडयंत्र रचने के तहत आरोपित बनाया गया था।
जाटव के बेटे की अपील पर भिंड कोर्ट ने बनाया था आरोपित
पुलिस और सीबीआई की जांच में पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य का नाम नहीं था, लेकिन मृतक माखनलाल जाटव के बेटे रणवीर जाटव ने भिंड के एट्रोसिटी एक्ट विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार गुप्ता की अदालत में याचिका पेश कर लालसिंह आर्य को भी आरोपित बनाए जाने की अपील की। रणवीर जाटव का तर्क था कि घटना के समय मौजूद लोगों ने देखा था कि लालसिंह आर्य घटनास्थल पर आए थे और उन्होंने ही अपने समर्थकों को हत्या के लिए उकसाया था।
पुलिस और सीबीआई ने जानबूझकर उन गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए, जिन्होंने लालसिंह आर्य की हत्या में संलिप्तता होने की बात कही थी। विशेष अदालत ने आर्य को आरोपित बनाने का फैसला दिया था। इस फैसले के खिलाफ मंत्री लालसिंह आर्य ने हाईकोर्ट में याचिका पेश की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 31 जनवरी को दिए निर्णय में लालसिंह आर्य को हत्या के मामले से बरी करने के लिए निचली अदालत को निर्देश दिए थे।
मंत्री रहते हुए फरार रहे थे आर्य
जिस वक्त लाल सिंह आर्य को आरोपित बनाया गया था, तब वे प्रदेश सरकार में मंत्री थे। आरोपित बनाने के बाद अदालत में पेश होने के लिए उनके खिलाफ 6 बार जमानती वारंट जारी हुए, लेकिन वे मंत्री रहते हुए फरार रहे। करीब डेढ़ साल बाद गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद उन्होंने अदालत में सरेंडर किया था। आर्य गोहद से ही विधायक रहे हैं और 2018 में वे चुनाव हार गए।



