माहे रमजान में मजहबी रिटर्न:शहर के 30 हजार परिवार 22 करोड़ 98 लाख की जकात बांटेंगे, ताकि जरूरतमंद भी मना सकें ईद
माहे रमजान में मजहबी रिटर्न:शहर के 30 हजार परिवार 22 करोड़ 98 लाख की जकात बांटेंगे, ताकि जरूरतमंद भी मना सकें ईद


पवित्र रमजान-उल-मुबारक में बंदे शहर में करीब 22.98 करोड़ रुपए ‘मजहबी टैक्स’ बाटेंगे। ये महीना बंदों के लिए रिटर्न फाइल करने की तरह भी है। जी हां, ये जकात है। दरअसल, रमजान में जकात देने की रिवायत है। ये मानवीय, सामाजिक एवं आर्थिक सरोकार से जुड़ी व्यवस्था है। ताकि कमजोर वर्ग के बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों के मुरझाए चेहरे खिल सके। वे भी ईदुल फितर की खुशियां मना सकें।
राजधानी में मुस्लिमों की अनुमानित आबादी 5 लाख के आसपास है। इसमें से 30 हजार परिवार ऐसे हैं, जिनकी तमाम खर्चों के बाद भी सालाना बचत होती है। ये जकात के दायरे में आते हैं। शेष परिवारों का जकात के दायरे में नहीं आने का बड़ा कारण आय के संसाधन सीमित होना, गुरबत, पारिवारिक खर्चें आदि हैं।
विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से विमर्श के बाद प्रसिद्ध चार्टड अकाउंटेंट जुबेर उल्लाह खान ने आंकलन करने के बाद बताया कि शहर में 30 हजार परिवार वार्षिक आय से हुई बचत के आधार पर जकात निकालते हैं। रमजान में बंदे फितरा भी बांटते है, लेकिन इसकी कोई सीमा तय नहीं है। बंदा हैसियत के हिसाब से कितना भी फितरा दे सकता है। लेकिन ईद की नमाज अदा करने के पहले ये बांटा जाता है।
पहले देते थे अनाज, अब देते हैं नकद राशि
भोपाल में जकात देने में इतना बदलाव आया है कि बंदे अब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नकद राशि दे देते हैं। पहले अनाज देने की व्यवस्था थी। वहीं समाज में कुछ ऐसे भी हैं, जो हैसियतमंद होते हुए जकात नहीं देते हैं। बताया जाता है कि अगर किसी बंदे के पास जरूरतों पर तमाम खर्च करने के बाद 100 रुपए सालाना बचते हैं तो भी उसमें से 2.5 रुपए किसी जरूरतमंद को देना जरूरी होता है। उन्हें कुल बचत का 2.50% बांटना अनिवार्य है।
किसे देनी होती है जकात
मसाजिद कमेटी के सचिव यासिर अराफात ने बताया कि यदि परिवार में 5 सदस्य हैं और सभी पैसा कमाते हैं तो सभी को जकात देना जरूरी है। कोई बेटा या बेटी भी कमाते हैं तो उनके माता-पिता अपनी कमाई पर जकात देकर नहीं बच सकते।
सक्षम व्यक्ति पर जकात अनिवार्य
आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति पर जकात अनिवार्य है। ये कृषि, मकान से होने वाली आय पर भी दी जाती है। इसका उद्देश्य जरूरतमंदों को मदद पहुंचाना है, ताकि उनमें हीनभावना न आए। -सैयद मुश्ताक अली नदवी, शहर काजी
ऐसे समझें… 1800 परिवार में से एक परिवार 2500 रुपए देता है तो ऐसे में यह राशि 4.50 करोड़ रुपए होती है।



