ममता बनर्जी की हार का सबसे बड़ा फायदा राहुल गांधी को, दो-दो मोर्चों पर कांग्रेस की खिल सकती हैं बांछे!
ममता बनर्जी की हार का सबसे बड़ा फायदा राहुल गांधी को, दो-दो मोर्चों पर कांग्रेस की खिल सकती हैं बांछे!


कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद ममता बनर्जी की सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है. बंगाल चुनाव में अब तक हुई वोटों की गिनती में भारतीय जनता पार्टी 185 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.
वहीं ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस केवल 93 सीटों पर आगे है. यूं तो पश्चिम बंगाल चुनाव कांग्रेस किसी भी सीट पर ना तो आगे है और ना ही कहीं भी उसके जीतने के आसार दिख रहे हैं. यहां तक कि बहरामुपर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के पूर्व सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अधीर रंजन चौधरी भी विधानसभा चुनाव में पिछड़ते दिख रहे हैं. कांग्रेस की इस दुर्गति की हर तरफ बातें हो रही है. लेकिन थोड़ा ध्यान से इस रिजल्ट को देखें तो इस हार में भी राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए दो-दो फायदा नजर आ रहा है.
इंडिया गठबंधन में राहुल गांधी को नेता मानना घटक दलों की मजबूरी
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इंडिया गठबंधन बनाया था. इंडिया गठबंधन के मिलकर लड़ने की वजह से 400 सीटें जीतने का दावा कर रही बीजेपी 240 सीटों पर सिमट गई. माना गया कि 99 सीटें जीतने वाली कांग्रेस अगर 25-30 सीटें और जीतती तो शायद केंद्र की सरकार कोई और रूप दिख सकता था. इस गठबंधन में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन दो ऐसे बड़े चेहरे थे जिन्हें इंडिया गठबंधन का नेता घोषित किए जाने की बातें हा रही थी. अब जब बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके चुनाव हार गई हैं तो ममता और स्टालिन की हनक इंडिया गठबंधन में घटना तय माना जा रहा है. इन दोनों नेताओं के कमजोर होने के मतलब साफ है कि स्वभाविक रूप से इंडिया गठबंधन के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी हो जाएंगे.
2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जैसे नेता ममता बनर्जी को चेहरा बनाने की सलाह देने लगे थे. अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव का भी झुकाव भी राहुल गांधी से ज्यादा ममता बनर्जी के प्रति ज्यादा दिखने लगा था. अब इस चुनाव का रिजल्ट आने के बाद इंडिया गठबंधन के सामने राहुल गांधी को सर्वमान्य नेता मानना मजबूरी हो गई है. इंडिया गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद ममता बनर्जी ने राहुल गांधी की कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में एक भी सीट देने से इनकार कर दिया था. इतना ही नहीं, इंडिया गठबंधन में जीतने भी दल हैं उसमें कांग्रेस के सबसे ज्यादा सांसद हैं और केरल में सरकार बनने के बाद देश के चार राज्यों में सत्ता है.
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के लिए खुलेंगे रास्ते
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस बुरी तरह हारी है, लेकिन इस हार में भी उसके लिए जीत के रास्ते दिख रहे हैं. बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के कमजोर होने के मतलब साफ है कि धर्म निरपेक्ष वोटर अपने लिए कांग्रेस में वजूद तलाश सकते हैं. वहीं कांग्रेस भी अगर प्रयास करे तो वह बंगाल में नये सिरे से अपनी खोई हुई जमीन तलाश सकती है. कांग्रेस 49 साल के वनवास के बाद पश्चिम बंगाल में नये सिरे से अपनी राजनीति शुरू कर सकती है. कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने जब से तृणमूल कांग्रेस बनाई तब से राहुल गांधी की पार्टी पश्चिम बंगाल में लगातार कमजोर होती चली गई. 71 वर्षीय ममता बनर्जी के हारने के बाद उनकी पार्टी का भविष्य क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा. लेकिन यह बात तय है कि पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद भी कांग्रेस और राहुल गांधी को दो-दो मोर्चों पर फायदा होने की उम्मीद जगी है.



