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ट्रंप के हाथ लगी ‘टैरिफ मिसाइल’, 100% टैरिफ के डर के बीच भारत की दो टूक – ‘ हम नहीं झुकेंगे’!

ट्रंप के हाथ लगी 'टैरिफ मिसाइल', 100% टैरिफ के डर के बीच भारत की दो टूक - ' हम नहीं झुकेंगे'!

US Tariff Policy India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथ वह ‘कानूनी शक्ति’ लग गई है जिसकी मदद से वह रूस और ईरान से ईंधन खरीदने वाले ‘व्यापारिक मित्रों’ पर एकतरफा प्रतिबंध लगा सकते हैं।

‘रूस-ईरान प्रतिबंध कानून’ पर हस्ताक्षर के बाद भले ही ट्रंप 100% टैरिफ का डर दिखा रहे हों लेकिन भारत ‘झुकेगा नहीं’ वाला मूड बना चुका है। भारत ने वाशिंगटन की आंखों में आंखे डालकर अपना रूख स्पष्ट कर चुका है।

महज 2 दिनों पहले ही विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत किसी तीसरे देश के दबाव में आकर अपनी विदेश और व्यापार नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिसकी वजह से देशवासियों के हित और सुरक्षा पर थोड़ा भी समझौता करना पड़े।

शीर्ष 5 देशों पर है निशान

इस नए बिल के प्रस्ताव में कहा गया है कि अगले 30 दिनों के भीतर यह नया टैरिफ नियम प्रभावी हो जाएगा। इसके निशाने पर वह 5 प्रमुख देश हैं जो पिछले एक साल में रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात के मामले में शीर्ष पर हैं।

स्वाभाविक रूप से इनमें भारत का नाम भी शामिल है। इस वजह से आशंका जताई जा रही है कि वर्तमान में भारत पर लागू औसत 10% शुल्क का पारा और चढ़ सकता है।

ऐसा करने की ‘कानूनी शक्ति’ ट्रंप के हाथों लग चुकी है। अब तक पोट्स द्वारा लाए गए ‘रिटेलिएटरी टैरिफ’ (जवाबी शुल्क), ‘लिबरेशन डे टैरिफ’ जैसे कई शुल्कों का बोझ अमेरिकी अदालतों में खारिज हो चुके थे। लेकिन इस बार वह काफी तैयारी और कड़े रुख के साथ मैदान में उतर रहे हैं।

नई मुश्किलें खड़ा कर सकता है एकतरफा अधिकार

जानकारों का कहना है कि नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने के बारे में फैसला लेने का एकतरफा अधिकार दे दिया गया है। अब यह पूरी तरह से उनकी मर्जी पर ही निर्भर करेगा कि वह किसे छूट देंगे या शुल्क का दायरा कितना बढ़ाएंगे।

यह शक्ति भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी असर डाल सकती है। इस कानून के बल पर अमेरिकी प्रतिनिधि कुछ हद तक मजबूत स्थिति में होने के दावे के साथ किसी भी बातचीत की शुरुआत कर सकेंगे।

इस दौरान भारतीय पक्ष पर इस बात का दबाव भी बना रहेगा कि व्यापार समझौते के मसौदे में व्हाइट हाउस की इच्छा के खिलाफ जाने की कोई भी कोशिश, उन्हें सीधे तौर पर शुल्क-मिसाइल के निशाने पर ला सकती है।

वहीं दूसरी ओर कुछ मार्केट विशेषज्ञों का दावा है कि पिछले कई महीनों से विभिन्न चरणों में बातचीत के बाद भारत और अमेरिका के बीच का द्विपक्षीय व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ऐसी स्थिति में अगर राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर बड़ा टैरिफ लगाते हैं तो यह पूरी मेहनत पर पानी फिरने जैसा होगा।

हालांकि ऐसी स्थिति में भारत के साथ-साथ अमेरिका को भी नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि यह समझौता नहीं होता है तो भारत के साथ-साथ अमेरिकी बाजार की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा। इस वजह से जानकार इस बात की संभावना भी जता रहे हैं कि ट्रंप भारत पर तुरंत टैरिफ का अतिरिक्त बोझ न डालकर ‘धीरे चलो’ की नीति भी अपना सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास कौन सी नई ‘कानूनी शक्ति’ आई है?

‘रूस-ईरान प्रतिबंध कानून’ के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस और ईरान से ईंधन खरीदने वाले देशों पर एकतरफा प्रतिबंध लगाने और टैरिफ बढ़ाने का एकतरफा अधिकार मिल गया है।

इस नए कानून के दायरे में कौन से देश आ रहे हैं?

इस नए नियम के निशाने पर वे 5 प्रमुख देश हैं, जो पिछले एक साल में रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात के मामले में शीर्ष पर हैं, जिनमें भारत भी शामिल है।

क्या इस कानून का असर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पड़ेगा?

जानकारों का मानना है कि इस कानून के कारण अमेरिकी प्रतिनिधि मजबूत स्थिति में बातचीत कर सकते हैं, जिससे प्रस्तावित व्यापार समझौते और आपसी वार्ताओं पर असर पड़ने की आशंका है।

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