आईपीएस पुरुषोत्तम क्या साजिश का शिकार हुवे, ससुर ने भी लगाए बहू पर मेंटल होने के अरोप


मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा का शोषल मीडिया पर वीडियो आया और वीडियो देखने के बाद लोगो को लगा कि महिला के साथ ज्यादती हुई है? वीडियो में सिर्फ एक ही पहलू दिख रहा है किंतु दूसरा पहलू क्या था? जिसने शर्मा को अपने बचाव में यह सब करना पड़ा अग्निब्लास्ट ने पड़ताल की शर्मा के सीनियर ,बेचमेंट, जूनियर लगभग एक दर्जन से ज्यादा आईएएस,आईपीएस से हुई बातचीत से दूसरा पक्ष पता लगता है कि शर्मा ने जो कुछ किया अपने बचाव में किया?जो शर्मा की पत्नी का स्वभाव जानते थे,जाहिर है पुरुषोत्तम शर्मा को यह सब करने के लिए उकसाया गया और साजिश के तहत दरवाजा खुलवाकर कैमरों के सामने लाया गया?जब कोई व्यक्ति मानसिक रूप से आपके व्यवहार को देखकर आपसे बात नही करना चाहता अपनी शांति भंग नही करना चाहता तो उसे क्यो उकसाना?जब पुरुषोत्तम शर्मा गलत थे तो पत्नी को किसने रोका था जबरन रिश्तों को बोझ जैसा ढोने के लिये! पति पत्नी का रिश्ता आत्मीयता का मित्रता का होना चाहिए जो एक दूसरे को समझ सके आज आदमी किन परिस्थितियों में बाहर काम कर अपनी जीविका चलाता है,नोकरी बचाता है उसकी आत्मा ही जानती है ऐसे में थका माँदा आदमी घर लौटे उसे घर में भी सकूँ नही मिले तो किस काम का जीवन ,जिसने अब तक का केरियर दांव पर लगा दिया? जब पुरुषोत्तम शर्मा का पुलिस महानिदेशक विवेक जोहरी के सेवानिवृत्त होने के बाद राजतिलक(पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश) होना तय था किन्तु पत्नी के आचरण ने सब कुछ एक झटके में खत्म कर दिया? सभी से गलती हुई मीडिया ट्रायल ,मुख्यमंत्री, सरकार में बैठे लोगों से जिन्होंने एक पक्ष जाना और पुरुषोत्तम शर्मा पर कार्यवाही कर उन्हें और दुःखी कर दिया सरकार को दूसरा पक्ष नोकरो, बेचमेंट के बयान और जरूरत पड़े तो पुरुषोत्तम शर्मा की पत्नी का नार्को टेस्ट कराना चाहिए ताकि सच पुरुषोत्तम शर्मा को खोया हुवा सम्मान लोटा सके ताज्जुब इस बात का है कि भ्रष्टाचार के अड्डे बने मध्यप्रदेश की जांच एजेंसियों ने उनकी जाँच खुलवा दी? क्यो आज तक जांच क्यो नही की?किसी के बुरे समय मे ये अड्डे क्यो जागृत हो जाते हैं? गज़ब की जांच एजेंसी!मध्यप्रदेश सरकार की जांच एजेंसी प्रामाणिक शिकायत साठगांठ से नस्तीबद्ध और अपने मतलब की शिकायत जिंदा वाकई एम पी गज़ब है?
आईपीएस पुरुषोत्तम के पिता कि ज़ुबानी
मैं परमानंद शर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा का पिता हूं। जिस तरह से मीडिया ने गलत तरीके से मेरे बेटे को हिंसक अपराधी के रूप में पेश किया है, उसे देखकर गहरा दुख हुआ है। 2008 से, प्रिया ने मानसिक संतुलन खो दिया है। उसने मुझे कुछ बार थप्पड़ मारा है, और खुद को और बच्चों को भी पीटा है। उसने हमेशा मेरे बेटे को ब्लैकमेल करते हुए अधिक पैसा पाने के लिए अदालत की बस्तियों का सहारा लिया. प्रिया के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है, हालांकि, मेरे बेटे ने पुलिस सेवाओं के इस तरह के जिम्मेदार पेशे में कड़ी मेहनत की है। ऐसी दुर्लभ महिलाओं के मनोरोग संबंधी मुद्दों और उद्देश्यों की व्याख्या करने के लिए इसका असंभव है।



