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किसानों के नाम पर हुए लाखों के फर्जीवाड़े की जांच ईओडब्ल्यू को


भोपाल। प्रदेश में किसानों के साथ हुए लाखों रुपए के फर्जीवाड़े की जांच सरकार अब राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) से कराएगी। मामला बालाघाट जिला सहकारी बैंक का है। इसमें किसानों को अंधेरे में रखकर कृषक सुरक्षा नामक पत्रिका सदस्य बनाया गया और उनके खाते से पत्रिका का सदस्यता शुल्क पत्रिका संचालक को दे दिया। कुल 12 हजार 263 किसानों के नाम पर एक करोड़ 69 लाख 93 हजार 802 रुपए का भुगतान किया गया। यह राशि लगभग 30 लाख रुपए और बढ़ सकती है।
राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) की सिफारिश पर सहकारिता विभाग ने जांच के लिए मामला ईओडब्ल्यू को सौंपने का फैसला किया है। इतना ही नहीं, जो पांच लीटर कृषक सुरक्षा गोल्ड लाइम (खेत में छिड़काव की दवा) मुफ्त देने का वादा किया गया था, वो भी नहीं देकर धोखाधड़ी की गई।
एक फीसदी हिस्सा बैंक को
सूत्रों के मुताबिक सितंबर 2018 में कृषक सुरक्षा पत्रिका के प्रकाशक ने बालाघाट जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र लिखकर समितियों के माध्यम से किसानों को इसका सदस्य बनाने का ऑफर दिया था। इसमें तीन साल की पत्रिका की सदस्यता दो हजार 550 रुपए रखी गई।
साथ ही कुल सदस्यता का एक फीसदी हिस्सा बैंक को प्रोत्साहन स्वरूप देने का प्रस्ताव था। इस ऑफर को बैंक स्वीकार करें, इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कृषि के प्रति जागरुकता अभियान को आधार बनाया गया।
बैंक ने इस ऑफर को बिना अपेक्स बैंक या सहकारिता विभाग की अनुमति लिए मंजूर कर लिया और समितियों को सदस्य बनाने के निर्देश दे दिए। कलेक्टर की जांच में यह बात प्रमाणित हो गई है। इसमें यह भी खुलासा हुआ कि सदस्यता शुल्क किसानों के परमिट पर समायोजन कर पत्रिका को भुगतान करने के निर्देश थे। मामले में बैंक के तत्कालीन सीईओ पीएस धनवाल को निलंबित भी किया गया।
भाजपा विधायक के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव से खुला मामला
सूत्रों का कहना है कि पूरा मामला विधानसभा के मानसून सत्र में लगाए गए एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव से खुला। बालाघाट जिले से भाजपा विधायक रामकिशोर कांवरे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगाकर कृषक सुरक्षा पत्रिका के नाम पर हुए इस खेल की जानकारी मांगी थी। जवाब के लिए जब पड़ताल हुई तब इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
आधा दर्जन बैंकों में फर्जीवाड़ा
सहकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कृषक सुरक्षा पत्रिका का फर्जीवाड़ा बालाघाट बैंक तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, सतना और टीकमगढ़ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक भी हैं। यह खुलासा अपेक्स बैंक द्वारा सहकारिता आयुक्त डॉ.एमके अग्रवाल के निर्देश पर कराई जांच में हुआ है।

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