Nepal News: बालेंद्र शाह का ट्रंप ने मान लिया लोहा! चीन को मात देने के लिए अमेरिका ने चली चाल, अलर्ट मोड में भारत!
Nepal News: बालेंद्र शाह का ट्रंप ने मान लिया लोहा! चीन को मात देने के लिए अमेरिका ने चली चाल, अलर्ट मोड में भारत!


काठमांडू: नेपाल में बालेंद्र शाह की नई सरकार बनने के बाद अमेरिका ने तेजी से कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर सोमवार को तीन दिन की अहम यात्रा पर काठमांडू पहुंच रहे हैं.
यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब कोई अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री सिर्फ नेपाल के लिए अलग से यात्रा कर रहा है. पहले की यात्रा में कोई भी देखा गया है कि मंत्री भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका का भी दौरा करते थे. यह बालेंद्र शाह के आने के बाद नेपाल की बढ़ती अहमियत दिखाता है. दोनों पक्षों में से किसी ने भी इस यात्रा का अनाउंसमेंट नहीं किया है, लेकिन काठमांडू पोस्ट में इससे जुड़ी रिपोर्ट सामने आई है. कपूर के साथ दो अन्य अधिकारी भी शामिल होंगे.
नेपाल में किससे मुलाकात करेंगे?
27 मार्च को प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद कपूर सबसे वरिष्ठ विदेशी अधिकारी होंगे जो नेपाल पहुंच रहे हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका नेपाल की नई सरकार के साथ जल्द और सीधे जुड़ाव चाहता है. इस दौरान कपूर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल, वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले और नेपाल-अमेरिका चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. हालांकि, अभी तक प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के साथ उनकी मुलाकात तय नहीं हुई है.
क्यों खास है ये दौरा?
इस यात्रा को केवल औपचारिक शिष्टाचार दौरा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे बड़ा रणनीतिक संदेश छिपा है. अमेरिका पहले ही साफ कर चुका है कि दक्षिण एशिया में किसी एक ताकत का दबदबा रोकना उसकी प्राथमिकता है. उसका सीधा निशाना चीन है. नेपाल, जो भारत और चीन के बीच स्थित है, इस रणनीति में अहम भूमिका निभाता है.
दरअसल, अमेरिका ‘चीन के कर्ज जाल’ को लेकर चिंता जता चुका है, जिसे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे में अमेरिका नेपाल में अपनी आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाना चाहता है. इसी के तहत MCC प्रोजेक्ट, अमेरिकी निवेश, स्टारलिंक इंटरनेट सेवाओं का विस्तार और व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दे एजेंडे में शामिल हो सकते हैं.
भारत को क्यों रखनी चाहिए नजर?
यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. नेपाल भारत का करीबी पड़ोसी और पारंपरिक सहयोगी रहा है. ऐसे में नेपाल में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की अमेरिकी कोशिशें भारत के हितों से भी मेल खाती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा दक्षिण एशिया में अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है. अमेरिका अब छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से अहम देशों- जैसे नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है.



