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राशन कार्ड धारकों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान

राशन कार्ड धारकों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान

CBDC Digital Rupee Ration Subsidy: देश के करोड़ों राशन कार्ड धारकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद खास और आधुनिक डिजिटल सुविधा की शुरुआत कर दी है। अब सरकारी राशन की दुकानों (FPS Shops) से राशन खरीदने के लिए आपको कैश या पुराने तरीकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

सरकार ने अब डिजिटल रुपये यानी सीबीडीसी (CBDC) के जरिए गेहूं और चावल खरीदने की नई व्यवस्था लागू कर दी है।

इस क्रांतिकारी व्यवस्था की शुरुआत सबसे पहले केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से की गई है। 14 अगस्त 2026 से लागू हुई इस नई डिजिटल प्रणाली को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के क्षेत्र में तकनीक का एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत, पात्र लाभार्थियों के बैंक डिजिटल वॉलेट में सीधे खाद्य सब्सिडी (Food Subsidy) की राशि भेजी जाएगी। राशन की दुकान पर पहुंचकर लाभार्थी को केवल QR कोड स्कैन करना होगा और डिजिटल रुपये से भुगतान करके अपना अनाज प्राप्त करना होगा। चंडीगढ़ में 55 हजार से अधिक राशन कार्ड धारकों को इस पहल से जोड़ा जा चुका है और इसके लिए 542 राशन दुकानों को डिजिटल सिस्टम से कनेक्ट किया गया है।

सिर्फ राशन खरीदने में ही इस्तेमाल होगी सब्सिडी की रकम

भारत सरकार ने इस नई व्यवस्था में एक सख्त और बेहद महत्वपूर्ण नियम भी जोड़ा है। डिजिटल वॉलेट में मिलने वाली सब्सिडी की रकम का इस्तेमाल लाभार्थी किसी भी अन्य चीज या निजी खरीदारी के लिए नहीं कर सकेगा। यह पैसा केवल और केवल तय सरकारी खाद्य सामग्री (गेहूं-चावल) खरीदने के लिए ही मान्य होगा। इस कदम से सरकार को सब्सिडी के सही इस्तेमाल की ट्रैकिंग करने में आसानी होगी और राशन वितरण में होने वाली धांधली या गड़बड़ी की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

एक महीने में इस्तेमाल नहीं किया पैसा तो सरकार के पास वापस लौटेगी राशि

इस नई डिजिटल रुपये की व्यवस्था में एक और खास नियम लागू किया गया है। अगर कोई लाभार्थी अपने डिजिटल वॉलेट में आई सब्सिडी की राशि का इस्तेमाल एक महीने की तय समय सीमा के भीतर नहीं करता है, तो वह बची हुई रकम अपने आप सरकारी खाते में वापस चली जाएगी। सरकार का मानना है कि इस नियम से पैसों के दुरुपयोग पर लगाम लगेगी, डिजिटल निगरानी मजबूत होगी और पूरी वितरण प्रणाली में शत-प्रतिशत पारदर्शिता (Transparency) आएगी।

चंडीगढ़ से शुरू हुआ यह पायलट प्रोजेक्ट अगर पूरी तरह सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जा सकता है। इससे सही और जरूरतमंद लाभार्थियों तक सीधी मदद पहुंचेगी और राशन व्यवस्था काफी हाईटेक और पारदर्शी बन जाएगी।

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