भोपाल: सोशल मीडिया पर धार्मिक नफरत फैलाने वालों की खैर नहीं, भड़काऊ पोस्ट पर कमेंट-लाइक करने वाले भी कार्रवाई के दायरे में
भोपाल: सोशल मीडिया पर धार्मिक नफरत फैलाने वालों की खैर नहीं, भड़काऊ पोस्ट पर कमेंट-लाइक करने वाले भी कार्रवाई के दायरे में


भोपाल। सोशल मीडिया पर धार्मिक और सामुदायिक वैमनस्य फैलाने वालों के खिलाफ भोपाल पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी है। अब फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ पोस्ट डालना ही नहीं, ऐसी पोस्ट पर आपत्तिजनक कमेंट करना भी भारी पड़ सकता है।
पोस्ट को लाइक, शेयर और फॉरवर्ड करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने शहर में लोक शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश 6 नवंबर से लागू किया गया है और अगले दो महीने तक प्रभावी रहेगा।
पोस्ट से ज्यादा कमेंट और क्रॉस कमेंट से फैलती है नफरत
प्रशासन ने सोशल मीडिया पर बढ़ती आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर चिंता जताई है। आदेश में कहा गया है कि कई बार किसी आपत्तिजनक पोस्ट से ज्यादा वैमनस्यता उसके नीचे आने वाले कमेंट और क्रॉस कमेंट से फैलती है। लोग बिना सोचे-समझे और बिना किसी जिम्मेदारी के ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जिनसे दूसरे समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
कई बार एक पोस्ट के बाद कमेंट की लंबी कड़ी शुरू हो जाती है। इसमें लोग एक-दूसरे के खिलाफ अश्लील और द्वेषपूर्ण भाषा का इस्तेमाल करते हैं। इससे विवाद बढ़ता है। सामाजिक माहौल खराब होने की आशंका रहती है। प्रशासन ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया है।
धार्मिक मुद्दों पर भड़काऊ पोस्ट डालने पर रोक
आदेश के अनुसार कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया का इस्तेमाल धार्मिक, सामाजिक या जातिगत भावनाएं भड़काने के लिए नहीं कर सकेगा। फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, एसएमएस और अन्य माध्यमों पर आपत्तिजनक संदेश, फोटो, वीडियो या ऑडियो प्रसारित करना प्रतिबंधित रहेगा।
ऐसी सामग्री भी प्रतिबंधित होगी, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा होने या दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलने की आशंका हो। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
कमेंट, लाइक और शेयर करने वालों पर भी नजर
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक, सांप्रदायिक या जातिगत भावनाएं भड़काने वाली पोस्ट पर कमेंट, लाइक, शेयर और फॉरवर्ड करने से भी बचना होगा। केवल पोस्ट डालने वाले व्यक्ति की ही जिम्मेदारी नहीं होगी। उसे आगे बढ़ाने वाले लोग भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
सोशल मीडिया पर किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाना, लोगों को उकसाना या हिंसा के लिए प्रेरित करना प्रतिबंधित है। ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने वालों पर पुलिस की नजर रहेगी।
व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन की भी तय होगी जिम्मेदारी
आदेश में सोशल मीडिया ग्रुप के एडमिन की जिम्मेदारी भी तय की गई है। ग्रुप में कोई व्यक्ति धार्मिक या जातिगत भावनाएं भड़काने वाला संदेश डालता है तो एडमिन को उसे रोकना होगा। ग्रुप में इस तरह के संदेशों का प्रसार रोकने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी एडमिन की होगी।
इसके अलावा किसी समुदाय के लोगों को एक जगह एकत्रित होकर गैरकानूनी गतिविधि करने के लिए उकसाने वाले संदेशों पर भी रोक रहेगी। अफवाह फैलाने और गलत जानकारी के जरिए लोगों को भड़काने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
लोक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए कदम
प्रशासन का कहना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सक्रिय ऐसे विवादों से लोक व्यवस्था और सामाजिक शांति को खतरा हो सकता है। कई बार पुराने वीडियो, फोटो और भ्रामक संदेशों को नए घटनाक्रम से जोड़कर प्रसारित किया जाता है। इससे लोगों में गलतफहमी और तनाव पैदा होता है।
इसी आशंका को देखते हुए यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी तरह के धार्मिक और सामाजिक विवाद को बढ़ने से रोकना है। पुलिस सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली ऐसी सामग्री पर नजर रखेगी।
उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई
धारा 163 के तहत जारी आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। यदि इसे बीच में वापस नहीं लिया जाता है तो यह आगामी दो महीने तक प्रभावी रहेगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भोपाल महानगर में जन सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना प्राथमिकता है। इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय लोग जिम्मेदारी बरतें और किसी भी तरह की भड़काऊ या आपत्तिजनक सामग्री को आगे न बढ़ाएं।



