भोपाल में लॉकडाउन का पास बनवाकर बाहर पहुंचाने वाला गिरोह पकड़ाया


LockDown in Bhopal : भोपाल। तलैया पुलिस ने लॉकडाउन में शासकीय अनुमति पत्र लेकर लोगों को शहर के बाहर पहुंचाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस को जो साक्ष्य मिले हैं, उसमें ट्रैवल्स के मालिक से लेकर ड्राइवर और एजेंट सभी शामिल थे। इसमें पुलिसकर्मी का भाई और यूपी के एक पूर्व शासकीय वकील के बेटे की भूमिका भी सामने आई है। इस मामले में अब तक एक आरोपित की गिरफ्तारी हो पाई है। आरोपित लॉकडाउन में फंसे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मनमाना किराया वसूलते थे। उनके पहचान पत्र का उपयोग कर पास बनवाते थे। पास बनाने के नाम पर दो हजार रुपए अलग से लिए जाते थे। पुलिस अन्य आरोपितों की तलाश में लगी है।
तलैया थानाप्रभारी डीपी सिंह ने बताया कि सूचना मिली थी कि टनाटन ढाबे के पास एक ट्रैवल्स एंड टूर कंपनी का एजेंट शैलेंद्र लोधी निवासी अहिंसा विहार कॉलोनी नरेला जोड़ अयोध्या बायपास का रहने वाला है। उसको मौके से गिरफ्तार कर थाने लाया गया। जहां पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह सिर्फ गाड़ी की बुकिंग करता था। बाकी पास बनवाने के काम में दूसरे लोग शामिल थे।
पूर्व शासकीय वकील का बेटा और पुलिसकर्मी के भाई भी थे शामिल : टीआई डीपी सिंह का कहना है कि इस मामले में सिविल लाइन इलाहाबाद में रहने वाले अभिषेक श्रीवास्तव का नाम सामने आ रहा है। शैलेंद्र का कहना है कि अभिषेक हरीकृष्ण टूर एंड ट्रैवल्स का मालिक है। उसके द्वारा 5 से 15 अप्रैल तक करीब 24 पास बनवाए गए। इसमें उनका सहयोग दीपक जोशी करता था। वह ग्राहक से संपर्क कर किराया तय करता था। उसे जानने वाले जब पास की बात करते थे तो वह भरोसा देता था कि वह उनके पहचान पत्र और पास बनवा देगा। वह अपनी मर्जी से किसी रिश्तेदार को हार्टअटैक आने या मृत्यु होने का कारण बताकर पास अपने साथी फतेह राजोरिया की मदद से बनवाता था। यह पास एक घंटे में बनकर तैयार हो जाते थे। हम बता दें कि अभिषेक श्रीवास्तव के पिता इलाहाबाद में जिला कोर्ट में शासकीय वकील रह चुके हैं। उनकी अब मृत्यु हो चुकी है। जबकि, फतेह का भाई पुलिस में है। इस समय पीएचक्यू में तैनात है।
शासकीय कर्मचारी भी संदेह के दायरे में
डीपी सिंह का कहना है कि मामले में आरोपित फतेह राजौरिया की गिरफ्तारी होना बाकी है। फर्जी पास बनाने वाले गिरोह का यह मास्टर माइंड है। इस काम में जरूर कोई शासकीय कर्मचारी इसकी मदद कर रहा होगा। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। इन लोगों ने करीब 24 पास बनवाए हैं। लोगों को शहर से बाहर भेजने में चार कार का उपयोग किया गया है। बाकी आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद और भी नई जानकारी सामने आ सकती है।



