मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बचे डेढ़ साल, कमलनाथ के कदम बड़े एकजुटता की ओर
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बचे डेढ़ साल, कमलनाथ के कदम बड़े एकजुटता की ओर


MP Assembly Election 2023: भोपाल- चुनावी मोड में आ रहे मध्य प्रदेश का प्रभाव कांग्रेस पर भी दिखाई पड़ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने जहां नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ दिया है, वहीं वे पार्टी के सभी धड़ों को साधने की कोशिश करते दिखाई पड़ रहे हैं। कोशिश है कि चुनाव से करीब एक साल पहले ही कांग्रेस एकजुट दिखाई देने लगे। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से दूर करने में कांग्रेस की यही एकजुटता कारगर साबित हुई थी। कमल नाथ ने इसकी शुरुआत दिग्विजय सिंह के करीबी डा. गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाकर शुरू कर दी है। उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग पहले से ही उठ रही थी, लेकिन कमल नाथ ने गंभीरता से नहीं लिया।
कुछ दिन पहले अचानक नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ दिया और सात बार के विधायक डा. गोविंद सिंह की नियुक्ति हो गई। कमल नाथ ने यह पद 20 महीने तक अपने पास रखा। माना जा रहा है कि कमल नाथ के तौर-तरीकों पर सवाल उठाने वाले अरुण यादव के साथ भी उनका समन्वय बन चुका है। यादव बीते दिनों से नाथ के खिलाफ न मुखर हैं, न नाराजगी जताई है। सूत्र बताते हैं कि यादव को राज्यसभा भेजने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। उधर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह ने भी अपने तल्ख तेवरों में नमी दिखाई है।
माना जा रहा है कि यादव और सिंह को संगठन में एक शक्ति संपन्न् कमेटी बनाकर बड़े मौके दिए जा सकते हैं। कांतिलाल भूरिया के पुत्र विक्रांत भूरिया प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष हैं। ऐसे में भूरिया को अपने साथ लेने में नाथ को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ रही है। हालांकि भूरिया आदिवासी वर्ग से आने के चलते पार्टी में बदलाव के बीच बड़ी उम्मीद रखते हैं। जहां तक सुरेश पचौरी के साथ आने की चर्चा है, तो उन्हें मैदानी तैयारियों से सक्रिय करने के संकेत हैं।
पूरा दम-खम लगाकर चाहते हैं कांग्रेस की वापसी
दरअसल, कमल नाथ बेहतर तरीके से समझते हैं कि मध्य प्रदेश में कई धड़ों में बटी कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए एकजुटता पहली शर्त है। इसका प्रमाण 2018 के रूप में सामने है। हालांकि बाद में धड़ों के फिर से बिखर जाने से न केवल पार्टी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, बल्कि कमल नाथ की सरकार भी गिर गई। माना जाता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद सरकार गिरने को कमल नाथ ने व्यक्तिगत स्तर पर ले लिया है और वह पूरा दम-खम लगाकर 2023 में सत्ता में कांग्रेस की वापसी चाहते हैं। यही वजह है कि आने वाले विधानसभा चुनाव को वे ‘करो या मरो’ का मानकर चल रहे हैं।
कमल नाथ जी, कांग्रेस के राष्ट्रीय रणनीतिकारों में शामिल हैं। उन्हें कब और कौन सा निर्णय लेना है, उसमें भी श्रेष्ठता हासिल है। पहले 20 सदस्यीय कोर कमेटी का गठन फिर वरिष्ठ नेताओं के साथ डीनर डिप्लोमेसी, नेता प्रतिपक्ष का चयन, उसी रणनीतिक श्रेष्ठता का संकेत है। आने वाले दिनों में भी ऐसे ही महत्वपूर्ण सामूहिक निर्णय सामने आएंगे। केके मिश्रा, महासचिव (मीडिया), प्रदेश कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उच्च स्तरीय बैठक आज
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उच्च स्तरीय बैठक रविवार को होगी। इसमें विधानसभा चुनाव 2023 की रणनीति पर बैठक में चर्चा की जाएगी। बूथ स्तर पर बेहतर मैनेजमेंट को लेकर चर्चा होगी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही कानूनी कार्रवाई पर भी सड़क पर उतरकर कार्यकर्ताओं की लड़ाई लड़ने की रणनीति बनाई जाएगी। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, पूर्व केंद्रीय सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सहित सभी पूर्व मंत्री शामिल होंगे।



