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चीन में 20 साल पुराने लेवल पर आईं घरों की कीमतें, जिन्होंने भारत में घर खरीदा है.. उनके लिए भी चेतावनी

चीन में 20 साल पुराने लेवल पर आईं घरों की कीमतें, जिन्होंने भारत में घर खरीदा है.. उनके लिए भी चेतावनी

Property price crash: चीन के प्रॉपर्टी मार्केट में आई भारी गिरावट ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. अब भारत के लोग भी इस बात को लेकर थोड़े डरे हुए हैं. खबर है कि चीन में घरों की कीमतें गिरकर साल 2005 के स्तर पर पहुंच गई हैं.

इसे यूं समझें कि पिछले 20 सालों में चीन ने रियल एस्टेट में जितनी ग्रोथ की थी, वह लगभग खत्म होती दिख रही है. लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या चीन जैसा हाल भारत में भी हो सकता है? आइए समझते हैं कि आखिर चीन में क्या हुआ और भारत को इससे कितना खतरा है.

चीन में प्रॉपर्टी की कीमतें आखिर क्यों गिरीं?

चीन की यह गिरावट कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ इसे एक ‘धीमी मौत’ की तरह देख रहे हैं जो पिछले चार सालों से लगातार जारी है. बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (Bank for International Settlements) के आंकड़ों के मुताबिक, अगर हम महंगाई को जोड़कर देखें तो चीन में घरों की कीमतें 2021 के मुकाबले करीब 23 प्रतिशत तक गिर चुकी हैं. इसका मतलब है कि वहां के लोगों की जमा-पूंजी का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो चुका है.

चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. इसमें रियल एस्टेट और उससे जुड़े कामों का हिस्सा लगभग 25 प्रतिशत था. वहां के आम लोग अपना पैसा शेयर बाजार में लगाने के बजाय घरों में निवेश करना ज्यादा पसंद करते थे. अब जब घरों के दाम गिर रहे हैं, तो करोड़ों परिवारों की संपत्ति मिट्टी में मिल रही है.

बड़ी कंपनियों का डूबना

चीन के इस संकट ने वहां की दिग्गज कंपनियों की कमर तोड़ दी है. कभी चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी रही एवरग्रांडे (Evergrande) पर 300 अरब डॉलर (करीब 25 लाख करोड़ रुपये) का कर्ज हो गया और वह पूरी तरह बर्बाद हो गई. इसी तरह कंट्री गार्डन (Country Garden) जैसी कंपनियां भी अपना कर्ज नहीं चुका पाईं. यहां तक कि बहुत ही सुरक्षित मानी जाने वाली कंपनी वानके (Vanke) को भी साल 2024 में 6.8 अरब डॉलर का भारी नुकसान हुआ है. हालत यह है कि चीन में बने हुए खाली घरों का अंबार है. करीब 391 मिलियन वर्ग मीटर में फैले घर खाली पड़े हैं जिन्हें कोई खरीदने वाला नहीं है.

क्या भारत को भी डरने की जरूरत है?

चीन के हालात देखकर भारत के सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है. कुछ लोगों को डर है कि रुपये की गिरती कीमत, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से नौकरियों पर मंडराते खतरे का असर भारत के प्रॉपर्टी बाजार पर भी पड़ सकता है. जानकारों का कहना है कि भारत में कई शहरों में घरों की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं, जबकि लोगों की कमाई उस हिसाब से नहीं बढ़ी. हालांकि, ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत और चीन के हालात काफी अलग हैं.

भारत में अभी भी घरों की मांग ठीक-ठाक है. कई जगहों पर तो घरों की कमी की रिपोर्ट्स भी आती रहती हैं. चीन में जरूरत से ज्यादा घर बना दिए गए थे, जबकि भारत में लोग अभी भी रहने के लिए घर ढूंढ रहे हैं. भारत का बाजार ‘इन्वेस्टमेंट’ से ज्यादा ‘इस्तेमाल’ करने वालों पर टिका है. फिर भी, चीन का यह संकट एक चेतावनी जरूर है कि अगर बिना सोचे-समझे कीमतें बढ़ती रहीं, तो आगे चलकर दिक्कत हो सकती है.

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