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ये युद्ध होना ही नहीं चाहिए था… मिडिल ईस्ट जंग पर चीन का बड़ा बयान, कहा- तुरंत रोको वरना…

ये युद्ध होना ही नहीं चाहिए था... मिडिल ईस्ट जंग पर चीन का बड़ा बयान, कहा- तुरंत रोको वरना...

Iran-US-Israel War: ईरान समेत पूरे मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच चीन ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान की आलोचना की है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) ने कहा कि यह संघर्ष कभी होना ही नहीं चाहिए था और क्षेत्र में जारी लड़ाई को तुरंत समाप्त कर कूटनीतिक वार्ता शुरू की जानी चाहिए.

चीन ने सैन्य कार्रवाई पर जताई चिंता

बीजिंग में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांग यी ने कहा कि सैन्य शक्ति का इस्तेमाल क्षेत्र में व्याप्त संकट का समाधान नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि बल प्रयोग से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमजोर होती है और इससे तनाव और बढ़ता है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कठोरता का मतलब तर्क नहीं होता. दुनिया जंगल के कानून की ओर नहीं लौट सकती. चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ईरानी सरकार को अस्थिर करने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करता है. वांग यी ने कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए व्यापक जनसमर्थन दिखाई नहीं देता और ऐसे प्रयास क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं.

तेहरान में सैन्य ठिकानों पर हमले

इस बीच IDF ने दावा किया कि इजरायली एयर फोर्स ने ईरान की राजधानी तेहरान में कई ईरानी सैन्य ठिकानों पर लक्षित हवाई हमले किए हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा गया कि ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़े कई ईंधन भंडारण परिसरों को निशाना बनाया गया. सेना के मुताबिक यह अभियान खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया था.

आईडीएफ के अनुसार इन परिसरों का इस्तेमाल ईरानी सैन्य इकाइयों को ईंधन और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता था. सेना ने दावा किया कि हमलों से ईरान के सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है.

ईरानी सैन्य क्षमता को भारी नुकसान: ट्रंप

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी और इजरायली कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के दुष्ट साम्राज्य को बड़ा झटका दिया है. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरान की नौसेना के कई जहाज नष्ट कर दिए गए हैं और उसकी वायुसेना तथा मिसाइल क्षमता को भी भारी नुकसान पहुंचा है. ट्रंप के मुताबिक, हमने उनकी नौसेना को लगभग खत्म कर दिया है. 44 जहाज नष्ट हो चुके हैं. उनकी मिसाइल निर्माण क्षमता और ड्रोन नेटवर्क पर भी भारी प्रहार किया गया है.

ट्रंप ने स्कूल पर हमले के आरोपों को किया खारिज

एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने उस आरोप को खारिज कर दिया कि अमेरिका ईरान के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह हमला ईरान की ओर से ही हुआ है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी हथियारों की सटीकता कम होने के कारण इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं.

हालांकि सैन्य कार्रवाई जारी रहने के बीच अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि संकट का कूटनीतिक समाधान अभी भी संभव है. उन्होंने कहा कि पहले दौर की बातचीत में ईरान का रुख काफी कठोर था और उसने यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार पर जोर दिया था. विटकॉफ के अनुसार अगर बातचीत आगे बढ़नी है तो तेहरान को अपने रुख में बदलाव करना होगा.

हमले के बाद क्षेत्र में बढ़ा तनाव

गौरतलब है कि मौजूदा लड़ाई की शुरुआत 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद हुई. इस हमले में ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने की खबर सामने आई थी जिनमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई भी शामिल बताए गए थे. इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में कई अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे.

इन हमलों में बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया गया था. इस टकराव ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है और इससे क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों और प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.

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